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ओबीसी व गरीब सवर्ण को राज्यों केसरकारी मेडिकल कॉलेजों में सेंट्रल कोटा

प्रदेश में ओबीसी की 170, ईडब्ल्यूएस की 63 सीट्सकुल कॉलेज 24सरकारी 16प्राइवेट 8कुल सीट्स 4200एआईक्यू सीट्स 630आरक्षण के बाद जुड़ेंगेओबीसी 170ईडब्ल्यूएस 63कुल 233 सीटों पर आरक्षण{सभी सीट्स यूजी की हैं, एआईक्यू की सीटों की संख्या में अभी कोई बढ़ोतरी नहीं

दूसरे राज्य में ऑल इंडिया कोटे में कर पाएंगे आवेदन
लंबे इंतजार के बाद अब राज्य सरकारों के मेडिकल कॉलेज में भी सेंट्रल कोटा के तहत रिजर्व 15% सीटों पर ओबीसी को 27% व आर्थिक रूप से कमजोर (ईडब्ल्यूएस) वर्ग के स्टूडेंट्स को 10% आरक्षण का लाभ मिलेगा। प्रधानमंत्री के निर्देश पर गुरुवार को केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने यह निर्णय लिया है। केन्द्र सरकार के मेडिकल कॉलेज में यह व्यवस्था पहले से लागू है। अब तक राज्य सरकारों के मेडिकल कॉलेजों में सेंट्रल कोटा के तहत सिर्फ अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति वर्ग के छात्रों को ही आरक्षण का लाभ मिलता था। इस घोषणा के बाद नीट यूजी की सभी 15% अखिल भारतीय सीटों पर यह आरक्षण भी लागू होगा। साथ ही नीट पीजी की 50% अखिल भारतीय सीटों पर यह आरक्षण लागू होगा। ओबीसी आरक्षण का फायदा नॉन-क्रीमी लेयर को ही मिलेगा। लाभ केंद्रीय कोटे में मिलेगा, अत: ओबीसी जातियों की केंद्रीय सूची के हिसाब से आरक्षण मिलेगा।
नीट में वर्ष 2020 में 84,649 एमबीबीएस सीटें थीं, इनमें करीब 50 फीसदी सरकारी मेडिकल कॉलेजों की थी। इस आधार पर आकलन किया जाए तो ओबीसी वर्ग के लिए करीब 1713 सीटें बढ़ जाएंगी। केंद्र सरकार के मुताबिक फैसले से ओबीसी वर्ग के तहत एमबीबीएस कोर्स में 1500, पीजी में 2500 और ईडब्ल्यूएस कोटे के तहत एमबीबीएस में 550 व पीजी में 1000 छात्रों को लाभ मिलेगा। यह लाभ एमबीबीएस, पीजी, बीडीएस, एमडीएस, एमडी, एमएस और डिप्लोमा के स्टूडेंट्स को इसी सत्र 2021-22 से मिलेगा। इस निर्णय के बाद सिर्फ काउंसिलिंग में बदलाव करना होगा, नीट की परीक्षा व परिणाम पर असर नहीं होगा। नीट यूजी के लिए 12 सितंबर काे प्रवेश परीक्षा प्रस्तावित है। वहीं नीट पीजी की 54,275 सीट्स के लिए परीक्षा 11 सितंबर को होगी। नीट यूजी में इस वर्ष करीब 17 लाख तथा नीट पीजी में करीब 3.5 लाख स्टूडेंट्स के शामिल होने का अनुमान है।
दाखिले के 2 विकल्प, प्रदेश में 233 सीटों पर ओबीसी-ईडब्ल्यूएस आरक्षण
जयपुर | मेडिकल कॉलेजों में ऑल इंडिया कोटे (एआईक्यू) की 15% सीटों पर ओबीसी व ईडब्ल्यूएस का आरक्षण लागू करने के बाद अब इन छात्रों के पास एडमिशन के दो विकल्प रहेंगे। पहला ऑल इंडिया कोटे के आधार पर वे 15% सीटों पर दाखिला ले पाएंगे। ऑल इंडिया कोटे से प्रवेश न मिला तो स्टेट रैंक के आधार पर स्टेट की 85% सीटों पर दाखिले का विकल्प भी खुला रहेगा। अब तक आरक्षण में शामिल न होने से ओबीसी के छात्रों को ऑल इंडिया कोटे के लिए कॉमन मेरिट लिस्ट में अच्छी रैंक लानी होती थी। वहीं अभी तक 15% सीटों पर दाखिले का लाभ ओबीसी वर्ग को नेशनल इंस्टीट्यूट्स और सेंट्रल यूनिवर्सिटीज में ही मिलता था।
सेंट्रल कोटे में सामान्य वर्ग के लिए 2348 एमबीबीएस की सीटें कम
सामान्यत: माना जाता है कि कुल एमबीबीएस सीटों में से 50% ही सरकारी मेडिकल कॉलेजों में होती हैं। 2020 की सीटों को आधार मानें तो सरकारी कॉलेजों में एमबीबीएस की कुल 42305 सीटें होंगी। समझें नया गणित...
यूं बढ़ेंगी ओबीसी की सीटें : {42305 सीटें सरकारी मेडिकल कॉलेज में हैं। अब तक इसमें 15% यानी 6346 सीटें ऑल इंडिया कोटे में जाती थी। {35959 सीटें बचती थी, इसमें 27% ओबीसी आरक्षण लागू होता था। यानी 9709 सीटें ओबीसी के लिए रिजर्व थीं। अभी तक ओबीसी के लिए आरक्षित सीटें इतनी ही थीं। ऑल इंडिया कोटे में हिस्सेदारी नहीं थी। अब ऑल इंडिया कोटे की 6346 सीटों में 27% के हिसाब से ओबीसी की 1713 सीटें होंगी।
50%
के करीब एमबीबीएस सीटें सरकारी कॉलेजों में हैं
{एमबीबीएस कोर्स में ओबीसी की 1713 और पीजी कोर्स में 2500 सीटें बढ़ीं
नीट में इसी सत्र से सेंट्रल कोटे में ओबीसी को 27% और ईडब्ल्यूएस को 10% आरक्षण
ऐसे समझिए... दाखिले का गणित
पहले आरक्षण न होने पर ओबीसी छात्र रैंक पीछे होती तो दाखिला नहीं मिलता था। अब 27% आरक्षण मिलने से रैंक पीछे है, लेकिन मेडिकल कॉलेज की कट ऑफ को पीछे की रैंक पर भी पार कर रहा है तो एआईक्यू में प्रवेश मिल जाएगा। यही नियम ईडब्ल्यूएस पर भी।
स्टेट कोटे का गणित : {42,305 सीटें सरकारी मेडिकल कॉलेज में हैं। अब तक 15% यानी 6,346 सीटें ऑल इंडिया कोटे में जाती थी। स्टेट कोटे में 35,959 सीटें बचती थी, इसमें 27% ओबीसी, 15% एससी, 7.5% एसटी का कोटा था यानी 17,800 सीटें रिजर्व थीं। {18,159 सीटें सामान्य वर्ग की थीं। {जिन राज्यों में ईडब्ल्यूएस वर्ग के लिए 10% सीटें रिजर्व हों, वहां 1816 सीटें और कम हो जातीं यानी 16,343 सीटें राज्यों के मेडिकल कॉलेजों में सामान्य वर्ग के लिए बचती थीं।
सेंट्रल कोटे का गणित : ऑल इंडिया कोटे की 6346 सीटों मेंं 15% एससी, 7.5% एसटी की यानी 1428 सीटों पर आरक्षण था। 4918 सीटें सामान्य वर्ग की थीं। अब ओबीसी व ईडब्ल्यूएस कोटा जुड़ने से कुल आरक्षण 59.5% हो गया। यानी 3776 सीटें रिजर्व। इस कोटे में 2570 सीटें ही सामान्य वर्ग के लिए बची हैं। यानी 2348 सीटें घट गईं।
269
मेडिकल कॉलेज निजी क्षेत्र के हैं अभी देश में
289
सरकारी मेडिकल कॉलेज हैं केंद्र व राज्यों के मिलाकर
84,649
एमबीबीएस की कुल सीटें हैं अभी देश में

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