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नीट पेपर लीक; सीकर में पूरा सॉल्व नहीं हुआ तो हरियाणा भेजा था प्रश्नपत्र, 35 लाख के सौदे में सबका हिस्सा तय था

ऐसे जुड़े थे तार...राम सिंह और नवरत्न मास्टरमाइंड थे, ई-मित्र संचालक ने मेडिकल छात्रा तक पहुंचाया
भांकरोटा में सोमवार को हुए नीट पेपर लीक मामले में पुलिस ने मंगलवार को परीक्षा कराने वाली एनटीए के डीजी को रिपोर्ट भेज दी है। साथ ही सीकर में दबिश देकर देर रात गिरोह से जुड़े एक और आरोपी सुनील रणवा को पकड़ लिया। जयपुर लाकर पूछताछ की गई तो उसने बताया कि पेपर आने के बाद आधे सवालों के जवाब उसने और उसके साथी दिनेश ने तैयार किए थे। बाकी प्रश्नों के जवाब के लिए पेपर हरियाणा में परिचित एक फिजिक्स टीचर को भेजा था। उसने आंसर-की भेज दी थी। डीसीपी वेस्ट ऋचा तोमर ने बताया कि पुलिस आरोपी को पकड़ने के लिए हरियाणा रवाना हो गई है। भांकरोटा में पेपर लीक मामले में मेडिकल छात्रा धनेश्वरी समेत 8 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। सौदा 35 लाख रु. में तय था। पूरे पैसे मिलने के बाद 10-10 लाख रु. सरगना राम सिंह व सेंटर प्रशासक मुकेश लेेेते। बाकी बचे 15 लाख रु. बिचौलिए नवरत्न, अनिल और सॉल्व करने वाली टीम के पंकज यादव, संदीप कुमार, सुनील, दिनेश बेनीवाल और हरियाणा के फिजिक्स टीचर को दिए जाने थे।
फर्जीवाड़े के 5 तरीके; डमी अभ्यर्थी, सेंटर सेटिंग से लेकर प्रेस से लीक तक
1. डमी अभ्यर्थी : परीक्षा के दौरान असल अभ्यर्थी की जगह पर दूसरे अभ्यर्थी से परीक्षा दिलवाना। इसके लिए मूल अभ्यर्थियों से 7 से 10 लाख रुपए वसूलते हैं। प्रताप नगर पुलिस ने यह गिरोह पकड़ा। इनमें सरगना सहित 10 लोगों को पकड़ा गया।

रामसिंह व नवरत्न स्वामी गिरोह के मास्टमाइंड हैं। कई सालों से दोस्त हैं। रामसिंह दोस्तों के साथ किराये पर रहकर तैयारी कर रहा है। नवरत्न स्वामी बानसूर में डिफेंस एकेडमी चलाता है। राजस्थान इंस्टीट्यूट अॉफ इंजीनियरिंग एवं टेक्नोलॉजी में प्रशासक के पद पर कार्यरत मुकेश सामोता व रामसिंह भी दोस्त हैंै। ऐसे में इस कॉलेज में होने वाली परीक्षाओं में रामसिंह कई बार वीक्षक लगता है। इस बार नीट में भी वीक्षक लग गया। रामसिंह ने नवरत्न को कॉलेज में सेंटर आने वाले छात्रों से सेटिंग कराने की बात कही तो नवरत्न ने ई-मित्र चलाने वाले परिचित अनिल को बताया। अनिल ने तुरंत पड़ोस में रहने वाले सुनील यादव की भतीजी धनेश्वरी के बारे में बताया। क्योंकि धनेश्वरी का फाॅर्म अनिल ने ही भरा था। प्रवेश पत्र भी उसने ही निकाला। इसलिए सेंटर का पता जानता था। उसके बाद अनिल ने धनेश्वरी के चाचा सुनील से 35 लाख में सौदा कर लिया। पंकज यादव व संदीप से पेपर सॉल्व नहीं हुआ तो उन्होंने सीकर में साथ पढ़े हुए दोस्त सुनील रणवा को भेज दिया। सुनील ने साथी दिनेश बेनीवाल से मिलकर आधा सॉल्व कर पाया। बाकी हरियाणा के टीचर से कराया।
‘एमबीबीएस छात्र रविवार सुबह 10 से 2:30 बजे तक अपने डिपार्टमेंट में रिपोर्ट करें, दो बार अटेंडेंस भी ली जाएगी।’
नीट का यही टाइम था, नकल न कराएं छात्र इसलिए संडे को बुलाया
_photocaption_कितना लाचार है सिस्टम, यह आदेश देखिए...*photocaption*
सबसे सम्मानित पेशा, फिर भी हर नवोदित डॉक्टर पर शक : नीट से एक दिन पहले कई जिलों में ऐसे मेडिकल स्टूडेंट पकड़े गए जो फर्जी अभ्यर्थी बनकर दूसरे की जगह पेपर देने वाले थे। सिस्टम की लाचारी देखिए! नकल राेकने का पुख्ता इंतजाम तो कर नहीं पाए। इसलिए एमबीबीएस स्टूडेंट्स को कॉलेज बुलाया।
सुनील रणवा
4. सेंटर से पेपर लीक : परीक्षा केंद्र के प्रबंधन से मिलीभगत करके सेन्टर पर पहुंचते ही पेपर की फोटो खींचकर मंगवा लेते हैंै। एक्सपर्ट टीम से तुरंत सॉल्व करवाकर आंसर-की पढ़वाते हैं।
5. प्रेस से पेपर लीक : जहां पेपर छपता है, वहां के कर्मियों को करोड़ों देकर पेपर मंगाते हैं। परीक्षा को जितना अधिक समय, पेपर उतना महंगा।
3. ब्ल्ूटूथ : इसके लिए अभ्यर्थी के कान में छोटा सा ब्लूटूथ लगाते हैं। इसे बाहर बैठे एक्सपर्ट से कनेक्ट कर पेपर सॉल्व करवाकर अभ्यर्थी तक आंसर पहुंचाते हैं।
2. सेंटर सेटिंग : परीक्षा केंद्र पर प्रबंधन से सेटिंग कर इन्विजीलेटर लगवाते हैं। परीक्षा के दौरान पेपर की फोटो खींचकर बाहर पहुंचाते हैं। जिसे सॉल्व कराकर वापस अभ्यर्थी को देते हंै।

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