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मैनेजमेंट फंडा


दुकानदारो, चिंता न करें, बेचने की कला बहुत नहीं बदली
इ स सवाल का तेजी से जवाब दीजिए। शाहरुख खान किस बिजनेस में हैं? बिना पलक झपके ही आपका तुरंत जवाब होगा, ‘बॉलीवुड’। दुर्भाग्य से आपका जवाब थोड़ा गलत है। सही जवाब है, वे एंटरटेनमेंट बिजनेस में हैं और यही कारण है कि वे फीस लेकर या बिना फीस लिए भी भीड़ के मनोरंजन के लिए कई इवेंट में भाग लेते हैं।
इसी तरह अगर हम सोचते हैं कि इवेंट मैनेजर्स सिर्फ बड़ी शादियों, जन्मदिन या कॉर्पोरेट इवेंट के आयोजनों के लिए ही होते हैं, जहां वे विभिन्न वेंडर्स के जरिए इवेंट को सफल बनाते हैं, तो हम थोड़ा गलत सोच रहे हैं। वे हमारी सिर्फ जश्न मनाने में मदद करे लिए नहीं हैं। चूंकि उनकी विशेषज्ञता आयोजन है, उनकी सेवाएं कहीं और भी इस्तेमाल हो सकती हैं। टीकाकरण में भी!
चौंक गए? यह रहा सबूत। मुंबई के बहुत महंगे रिहायशी इलाके के पाली हिल रेसिडेंट्स एसोसिएशन ने टीकाकरण अभियान के लिए बांद्रा के एक इवेंट ऑर्गेनाइजर को नियुक्त किया, जिसमें दो दिन में करीब 1000 लोगों को टीका लगना था। फर्म ने स्लॉट पर काम किया। प्रत्येक रहवासी ने सोशल डिस्टेंसिंग और अन्य कोविड प्रोटोकॉल का पालन करते हुए टीका लगवाया। उन्होंने ऐसी योजना बनाई, जिसमें हर घंटे 50 रहवासियों का टीकाकरण हुआ। तेजी, निपुणता, सुरक्षा और क्रियान्वयन, ये गुण किसी भी इवेंट मैनेजमेंट कंपनी को सफलता दिलाते हैं। इसलिए, वे सिर्फ जश्न तक ही सीमित क्यों रहे?
इसी तरह, एक सर्वे में दावा है कि 66% भारतीय ऑनलाइन शॉपिंग और नो-कॉन्टैक्ट होम डिलीवरी पसंद करते हैं। देश के 303 जिलों से मिले 40,000 जवाबों पर आधारित सर्वे का उद्देश्य यह पता करना था कि क्या ऑनलाइन खरीदारी का ट्रेंड बना रहेगा और नागरिकों की खरीदारी में प्राथमिकता क्या है। ऐसे सर्वेक्षणों से यह सोचकर परेशान न हों कि ईंट-गारे से बनीं दुकानों के बिजनेस मॉडल का क्या होगा, जिसमें शहर के छोटे या मध्यम दुकानदार बैठकर ग्राहकों का इंतजार करते हैं। ‘बिंदुओं को जोड़ना’ सीखें। पहली बात, यह सर्वे ऑनलाइन हुआ था। फिर जवाब देने वाले तकनीक के जानकार थे इसलिए उन्होंने जवाब दिए। और यह 130 करोड़ लोगों के देश में महज 40,000 लोगों का सर्वे था। ऐसे सर्वे खास ट्रेंड की नब्ज और बढ़ती लोकप्रियता जानने के लिए होते हैं और ऑफलाइन बिजनेस बंद होने का संकेत नहीं देते।
ऑनलाइन लोकप्रियता वायरस के डर और खरीदारी की सुविधा के कारण बढ़ रही है। जहां सुविधा तो बरकरार रहेगी, लेकिन टीकाकरण के साथ डर खत्म होता जाएगा। दुनियाभर में खरीदारों की एक कमजोरी है कि वे हमेशा उत्पादों को छूकर देखना और खरीदना चाहते हैं। और यह सिर्फ ईंट-गारे से बनी दुकान में संभव है, ऑनलाइन विक्रेता के गोदाम में पड़े उत्पाद से नहीं।
इसका मतलब यह नहीं कि ऑनलाइन शॉपिंग नहीं बढ़ेगी। स्वाभाविक है कि बढ़ेगी, लेकिन उन उत्पादों के लिए जिनके प्रति ग्राहकों की वफादारी है। लेकिन जब निजी उत्पादों की बात होगी, जैसे टूथब्रश आदि, तो हम रंग, आराम, ब्रश की पकड़ आदि के विकल्प देखना चाहेंगे। ग्राहकों को मेरी सलाह है कि वे स्थानीय दुकानों पर जाकर विकल्प पाएं, लेकिन कोविड प्रोटोकॉल के पालन के साथ।
फंडा यह है कि दुकानदारों को ऑनलाइन मॉडल पर अपनी मौजूदगी बनानी चाहिए और ऑफलाइन मॉडल में भी ग्राहकों को वैरायटी देकर अपनी मौजूदगी बढ़ानी चाहिए, ताकि वे आपकी दुकानों पर आकर उत्पादों को महसूस कर सकें।
एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु [raghu@dbcorp.in]

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