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12 राज्य | 61 संस्करण 12 राज्य | 61 संस्करण हमारा स्टील मनवा रहा देश में लोहा, बिजली-कोयला भर रहे ऊर्जा हमारा स्टील मनवा रहा देश में लोहा, बिजली-कोयला भर रहे ऊर्जा स्टील का एहसास कराता आज का मास्टहेड स्टील का एहसास कराता आज का मास्टहेड ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष - 7, 2079 ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष - 7, 2079 धनबाद, रविवार, 22 मई , 2022 धनबाद, रविवार, 22 मई , 2022 2030 तक उत्पादन क्षमता 10 मिलियन बढ़ाने का लक्ष्य 2030 तक उत्पादन क्षमता 10 मिलियन बढ़ाने का लक्ष्य 100 लाख टन से ज्यादा कोयले का उत्पादन बेरमो क्षेत्र में हो रहा है 100 लाख टन से ज्यादा कोयले का उत्पादन बेरमो क्षेत्र में हो रहा है झारखंड के पास 86216 मिलियन टन कोयले का भंडार, देश में सबसे ज्यादा झारखंड के पास 86216 मिलियन टन कोयले का भंडार, देश में सबसे ज्यादा जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, देश में सबसे अधिक 86216.82 मिलियन टन कोयले का भंडा जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, देश में सबसे अधिक 86216.82 मिलियन टन कोयले का भंडार झारखंड में है। देश में 70 वर्षों तक कोयले की जितनी जरूरत होगी, उसे अकेले झारखंड पूरा कर सकता है। बोकारो के बेरमो अनुमंडल क्षेत्र और गिरिडीह में कोयले का अकूत भंडार है। हमारे कोयले से देश में कल कार बोकारो के बेरमो अनुमंडल क्षेत्र और गिरिडीह में कोयले का अकूत भंडार है। हमारे कोयले से देश में कल कारखाने और बिजली घर चल रहे हैं। बेरमो में सीसीएल के तीन एरिया ढोरी, बोकारो एंड करगली (बीएंडके)और कथारा हैं, जिसमें 10 ओपनकास्ट और दो अंडरग्राउंड माइंस हैं। इनमें हर साल 100 लाख टन से ज्यादा कोयले का उत्पादन हो रहा है। इससे देश को करीब 500 करोड़ रुपए राजस्व मिल रहा है। क्षेत्र में कोयले का भंडार है। अमलो परियोजना में 100 मिलियन कोयला है। एसडीओसीएम मंे 46 मिलियन, पिछरी में 19 मिलियन, जारंगडीह में 22 मिलियन, गोविंदपुर फेस टू में 28 मिलियन और कथारा में 20 मिलियन टन कोयला है। स्वांग पिपराडीह में 14 मिलियन टन का नया भंडार मिला है। साल अंत तक पिछरी और अंगवाली खदान खोली जा सकती हंै। स्वांग और कथारा मंे नई वाशरी बनाने की तैयारी हो चुकी है। कारो फेज टू और खासमहल फेज टू का विस्तार करना है। ऐसे में रोजगार की बड़ी संभावनाएं हैं। हमारे कोयले से चल रहे देशभर के बिजली प्लांट और कल-कारखाने हमारे कोयले से चल रहे देशभर के बिजली प्लांट और कल-कारखाने 722 बिलियन घन मीटर कोल बेड मिथेन का झारखंड में भंडार 722 बिलियन घन मीटर कोल बेड मिथेन का झारखंड में भंडार बाेकारो जिला में तीन लाख की आबादी को मिलेगा प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रोजगार बाेकारो जिला में तीन लाख की आबादी को मिलेगा प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रोजगार सीबीएम उत्पादन से गोमिया की करीब 3 लाख की आबादी को रोजगार मिलेगा। ओएनजीसी के इंजीनियरों के अनुसार, ए सीबीएम उत्पादन से गोमिया की करीब 3 लाख की आबादी को रोजगार मिलेगा। ओएनजीसी के इंजीनियरों के अनुसार, एलपीजी में 92 फीसद तक मिथेन गैस का मिश्रण रहता है। इसलिए इस गैस का उपयोग वैकल्पिक ईंधन के रूप में किया जाएगा। देश का सबसे बड़ा कोल बेड मिथेन भंडार (सीबीएम) झारखंड में है। केंद्र सरकार की रिपोर्ट के अनुसार, झारखं देश का सबसे बड़ा कोल बेड मिथेन भंडार (सीबीएम) झारखंड में है। केंद्र सरकार की रिपोर्ट के अनुसार, झारखंड में 722.09 बिलियन घन मीटर कोल बेड मिथेन का भंडार है। ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन (ओएनजीसी) की ओर से कई मिथेन ब्लॉक के संचालन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इस गैस से झारखंड में बिजली और रसोई गैस की कमी दूर हो सकेगी। बोकारो में मिले 45 अरब घनमीटर सीबीएम गैस के भंडार पर ओएनजीसी काम कर रही है। जिले के पर्वतपुर और गोमिया में मिथेन गैस का भंडार मिला है। गोमिया में 140 कुआं से मिथेन गैस निकालने की योजना है। गोमिया के खुदगडा में गैस भंडारण का प्लांट बनेगा, जहां से देश में पाइपलाइन से मिथेन गैस आपूर्ति करने की योजना है। बोकारो केे पर्वतपुर में सबसे बड़ा मिथेन गैस भंडार है। यहां उत्पादन का लक्ष्य 4.6 लाख घनमीटर प्रतिवर्ष रखा गया है। आसपास क्षेत्र में गैस की उत्पादन क्षमता 35 लाख घनमीटर प्रतिवर्ष निर्धारित है, यहां 25 सालों तक गैस निकाली जा सकेगी। झारखंड में देश का सबसे बड़ा मिथेन भंडार, दूर होगी रसोई गैस की कमी झारखंड में देश का सबसे बड़ा मिथेन भंडार, दूर होगी रसोई गैस की कमी बिजली, स्टील, कोयला और गैस हमारी समृद्धि का पावर बैंक बिजली, स्टील, कोयला और गैस हमारी समृद्धि का पावर बैंक हमसे है रोशन जहान...झारखंड में सबसे ज्यादा थर्मल पावर प्लांट बोकारो जिला में है। यहां 4 प्लांट से 20 हमसे है रोशन जहान...झारखंड में सबसे ज्यादा थर्मल पावर प्लांट बोकारो जिला में है। यहां 4 प्लांट से 2000 मेगावाट से ज्यादा बिजली पैदा होती है। बांग्लादेश को 300 मेगावाट बिजली दी जाती है। आज तरक्की-ताकत-तकनीक पर गर्व करने का दिन...क्योंकि इन तीन शक्तिशाली शब्दों को बतौर ब्रांड दुनिया में आज तरक्की-ताकत-तकनीक पर गर्व करने का दिन...क्योंकि इन तीन शक्तिशाली शब्दों को बतौर ब्रांड दुनिया में रोशन कर रहे हमारे औद्योगिक नगर बोकारो, गिरिडीह, जामताड़ा। इन जिलों में भास्कर की 11वीं वर्षगांठ पर पाठकों को हमारा शक्तिशाली अंक समर्पित... 2.50 लाख लोगों को मिला प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार 2.50 लाख लोगों को मिला प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार गिरिडीह में कांटी कं. से पड़ी उद्योग की नींव... अब नेपाल जाता है हमारा सरिया गिरिडीह में कांटी कं. से पड़ी उद्योग की नींव... अब नेपाल जाता है हमारा सरिया अबरख उद्योग के रूप में पहचान बनाने वाला गिरिडीह अब लौहनगरी बन चुका है। 1974 में कांटी फैक्ट्री से उद अबरख उद्योग के रूप में पहचान बनाने वाला गिरिडीह अब लौहनगरी बन चुका है। 1974 में कांटी फैक्ट्री से उद्योग की नींव पड़ी थी। 1994 में रोलिंग मील खुली। आज यहां सरिया की 50 फैक्ट्री हैं, इससे 2.50 लाख लोगों को रोजगार मिल रहा है। बोकारो बिजली उत्पादन में सबसे आगे है। 4 थर्मल पावर प्लांट से सिर्फ जिले की जरूरतें ही पूरी नहीं होती बोकारो बिजली उत्पादन में सबसे आगे है। 4 थर्मल पावर प्लांट से सिर्फ जिले की जरूरतें ही पूरी नहीं होती, बल्कि बिहार, दिल्ली, पंजाब, उत्तर प्रदेश, ओडिशा, पश्चिम बंगाल सहित रेलवे और छोटे-बड़े कल-कारखानों को बिजली सप्लाई की जाती है। हमारी बिजली से बांग्लादेश भी रोशन होता है। बोकारो जिले में चार थर्मल पावर प्लांट से करीब 2000 मेगावाट बिजली पैदा होती है। इनमें चंद्रपुरा (सीटीपीएस) व बोकारो थर्मल (बीटीपीएस) से करीब 1300 मेगावाट, तेनुघाट थर्मल पावर प्लांट से 420 मेगावाट और बीपीएससीएल बोकारो से 300 मेगावाट बिजली का उत्पादन होता है। बीपीएससीएल की बिजली से बोकारो इस्पात संयंत्र का संचालन होता है। हमारे जिले से बांग्लादेश को 300 मेगावाट बिजली आपूर्ति की जा रही है। अब जिले में छठवां पावर प्लांट चंदनकियारी में लगाने की योजना है। शिलान्यास हो चुका है। चंदनकियारी के सिमुलिया में बनना है। पावर प्लांट लगाने वाली कंपनी को सरकार ने 82.83 एकड़ जमीन भी आवंटित कर दी है। बोकारो, यानी झारखंड का दूसरा मिनी इंडिया। जमशेदपुर के बाद यह दूसरा शहर है, जिसे स्टील सिटी के रूप मे बोकारो, यानी झारखंड का दूसरा मिनी इंडिया। जमशेदपुर के बाद यह दूसरा शहर है, जिसे स्टील सिटी के रूप में जाना जाता है। सार्वजनिक क्षेत्र में देश का चौथा और झारखंड का पहला इस्पात संयंत्र बोकारो में है। वर्तमान में करीब 11 हजार कर्मचारी-अधिकारी काम करते हैं, लेकिन बीएसएल और इससे जुड़ी इकाइयों से करीब पांच लाख लोगाें की रोजी-रोटी चलती है। 1965 में स्थापित बोकारो स्टील प्लांट का गौरवमयी इतिहास रहा है। 10 मिलियन टन क्षमता की परिकल्पना के साथ प्लांट की नींव रखी गई थी, लेकिन 4.5 मिलियन टन उत्पादन हो रहा है। अब क्षमता 10 मिलियन टन बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने 27 हजार करोड़ रुपए खर्च करने की योजना बनाई है। योजना 2023-24 से शुरू होगी और 2030 में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। योजना पूरा होने पर उत्पादन क्षमता 14.5 मिलियन टन हो जाएगी। स्थापना काल में यहां 37 हजार कर्मचारी थे। विस्तारीकरण से कर्मचारियों की बहाली होगी और रोजगार बढ़ेंगे। 7 साल में 27 हजार करोड़ खर्च कर 10 मिलियन टन क्षमता बढ़ाने की योजना 7 साल में 27 हजार करोड़ खर्च कर 10 मिलियन टन क्षमता बढ़ाने की योजना शक्ति... इतनी कि 70 साल कोयले की कमी नहीं हाेगी शक्ति... इतनी कि 70 साल कोयले की कमी नहीं हाेगी कारखाने में स्टील उत्पादन की क्षमता 4.5 लाख मिलियन टन है। 2030 तक10 मिलियन टन और बढ़ाने का लक्ष्य है। कारखाने में स्टील उत्पादन की क्षमता 4.5 लाख मिलियन टन है। 2030 तक10 मिलियन टन और बढ़ाने का लक्ष्य है। क्षमता बढ़ेगी तो रोजगार के साधन बढ़ेंगे। छोटे उद्योगों को भी लाभ होगा। ऊर्जा... मिथेन से पूरी होंगी रसोई गैस की जरूरतें ऊर्जा... मिथेन से पूरी होंगी रसोई गैस की जरूरतें एनर्जी... हमारी बिजली से बांग्लादेश भी होता है रोशन एनर्जी... हमारी बिजली से बांग्लादेश भी होता है रोशन मजबूती... आधुनिक भारत की जरूरतें पूरी करेगा बोकारो मजबूती... आधुनिक भारत की जरूरतें पूरी करेगा बोकारो सौर ऊर्जा... झारखंड की सोलर सिटी बनेगा गिरिडीह सौर ऊर्जा... झारखंड की सोलर सिटी बनेगा गिरिडीह कोयला... आजीविका का आधार कोयला... आजीविका का आधार मिथेन... ईंधन का विकल्प मिथेन... ईंधन का विकल्प हममें सुप्रीम पावर हममें सुप्रीम पावर स्टील... 57 साल का अटूट रिश्ता स्टील... 57 साल का अटूट रिश्ता बेरमो में जितना भंडार, लोगों का रोजगार कम नहीं होगा बेरमो में जितना भंडार, लोगों का रोजगार कम नहीं होगा दिसंबर से मिथेन का व्यावसायिक उत्पादन और बिक्री दिसंबर से मिथेन का व्यावसायिक उत्पादन और बिक्री यहां के फौलादी लोग देश की मजबूती में दे रहे योगदान यहां के फौलादी लोग देश की मजबूती में दे रहे योगदान पहाड़ पर बांध बनाकर पनबिजली बनाने की योजना पहाड़ पर बांध बनाकर पनबिजली बनाने की योजना
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