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<area shape="rect" class="borderimage" coords="16.7896069444444,62.16492925,744.289606944444,921.16492925" href="javascript:void(0);" onclick="return show_pop( शिवावतारभगवान शिव के भिन्न अवतार और उनकी कथाएं स्रोत: शिवपुराण।पढ़ें हर पृष्ठ पर... जगत में एकमात्र शिव ही हैं जिनकी गृहस्थी परम सुख व शांति से परिपूर्ण होकर मंगलमय है। यही कारण है कि जगत में एकमात्र शिव ही हैं जिनकी गृहस्थी परम सुख व शांति से परिपूर्ण होकर मंगलमय है। यही कारण है कि हम सभी सांसारिक गृहस्थ अपनीगृहस्थी में मंगल के लिए शिवजी और भगवती पार्वती की शरण लेते हैं। कुंआरी कन्याएं मनोवांछित वर तथा सुहागिनें अखंड सुहाग के लिए शिव-पार्वती से जुड़े ही व्रतों को करती हैं और दाम्पत्य को आनंदित एवं घर-आंगन को आलोकित करती हैं।** जटिलताओं को मुकुट बनानाशं करजी को जटाओं के मुकुट से मंडित और सर्प के आभूषणों से अलंकृत दर्शाया गया ह जटिलताओं को मुकुट बनानाशं करजी को जटाओं के मुकुट से मंडित और सर्प के आभूषणों से अलंकृत दर्शाया गया है। भस्म उनका अंगराग है और बाघाम्बर जैसा वस्त्र। उन्हें उपेक्षित आंकड़े का फूल व कांटेदार बिल्वपत्र प्रिय हैं। मानो जीवन की जटिलताओं और अन्यों के अप्रिय को वे सहज स्वीकारते ही नहीं, अपना शृंगार भी बना लेते हैं। वे सिखाते हैं कि उलझनों और गृहस्थी के दबाव से हमें घबराना नहीं चाहिए। जो गृहस्थ इनके दबाव में न आकर इनका उपयोग करने की कला सीख जाता है, उसी की गृहस्थी शिव-सी मंगलमय हो पाती है।  कामनारहित और आशुतोष पतिशं करजी ने अपनी तपस्या में विघ्न उत्पन्न करने वाले कामदेव को भस्म कर दिया था। कामनारहित और आशुतोष पतिशं करजी ने अपनी तपस्या में विघ्न उत्पन्न करने वाले कामदेव को भस्म कर दिया था। पुराणों में उन्हें इसीलिए ‘कामारि आमुख } { डाॅ. विवेक चौरसिया पौराणिक साहित्य के अध्येताभगवान शिव यूं तो देवताओं, दानवों, सिद्धों, साध आमुख } { डाॅ. विवेक चौरसिया पौराणिक साहित्य के अध्येताभगवान शिव यूं तो देवताओं, दानवों, सिद्धों, साधकों, भक्तों, योगियों, कवियों और कलाकारों सभी के आराध्य देव हैं, साथ ही वे गृहस्थों के भी आदर्श देवता हैं। उनकी गृहस्थी आदर्श गृहस्थी है और शिव-पार्वती आदर्श दम्पती। दाम्पत्य का सत्संगशं कर-पार्वती की गृहस्थी की सबसे बड़ी विशेषता है कि उन्हें जब भी अवकाश मिलता है, द दाम्पत्य का सत्संगशं कर-पार्वती की गृहस्थी की सबसे बड़ी विशेषता है कि उन्हें जब भी अवकाश मिलता है, दोनों अपने एकांत को सत्संग से सजा लेते हैं। शिव-पार्वती सदैव पुराणों की कथाएं और जीवन के गूढ़ प्रश्नों पर परस्पर चर्चा किया करते हैं। महाभारत के अनुशासन पर्व में 20 से अधिक अध्यायों में इसी तरह का ज्ञान-संवाद है। इसी चिर सान्निध्य में ‘अर्धनारीश्वर’ की कल्पना भी साकार होती है। ये देव दम्पती हमें प्रेरणा देता है कि हम भी फुर्सत के पलों को शिकायतों के बजाय सत्संग से जगमग करें तो दाम्पत्य बंधन दृढ़ होगा। तप और त्याग की गृहलक्ष्मीपा र्वती का एक नाम उमा है जिसका संस्कृत में अर्थ है ‘अरी! तपस्या मत कर।’ श तप और त्याग की गृहलक्ष्मीपा र्वती का एक नाम उमा है जिसका संस्कृत में अर्थ है ‘अरी! तपस्या मत कर।’ शिवप्राप्ति के कठिन तप से माँं उन्हें ‘उमा’ कहकर रोकती थीं। मगर पार्वती तप का पर्याय बनीं। देवी का त्याग गृहस्थी स्वीकारने वाली सभी स्त्रियों के लिए प्रेरक है। प्रेमी प्रभु की प्राप्ति के लिए ‘राजकुमारी’ पार्वती राजसी सुखों का त्यागकर शिव के साथ गुफा में रहना स्वीकार करती हैं। देवी सिखाती हैं कि असल सुख भौतिक साधनों में नहीं दाम्पत्य की मधुरता में है। परस्पर त्याग और तप (श्रम/सहयोग) से ही यह फलता-फूलता है। योगी से गृहस्थ हुए शिवशं कर आदि गुरु हैं। वे योगी हैं मगर गृहस्थी की महिमा को जानते और मानते हैं। इस योगी से गृहस्थ हुए शिवशं कर आदि गुरु हैं। वे योगी हैं मगर गृहस्थी की महिमा को जानते और मानते हैं। इसीलिए लोक कल्याण के निमित्त देवताओं का मान रखने के लिए वे योगी से गृहस्थ बन जाने की लीला करते हैं। वे दुराचारी दैत्य तारकासुर का वध करने के लिए अपेक्षित पुत्र हेतु पार्वतीजी से विवाह रचाते हैं और स्कंद के जन्मदाता बनकर गृहस्थी को सार्थक करते हैं। महादेव सिखाते हैं कि धर्म, अर्थ व काम तीनों पुरुषार्थ की सिद्धि केवल गृहस्थ के लिए ही सम्भव होती है, अतः वे भी गृहस्थ हो जाते हैं। सृजन का पर्व महाशिवरात्रिप र्व का अर्थ ही मिलना है। महाशिवरात्रि शिव व पार्वती के मिलन के प्रतीक के सृजन का पर्व महाशिवरात्रिप र्व का अर्थ ही मिलना है। महाशिवरात्रि शिव व पार्वती के मिलन के प्रतीक के रूप में पुरुष और प्रकृति के मिलन का महापर्व है। भगवान शिव आदि, अनादि, अजन्मे और अयोनिज होकर स्वयंभू हैं। उनकी अर्द्धांगिनी देवी पार्वती आद्य शक्ति हैं। महादेव और देवी पार्वती के प्राकट्य की कोई निश्चित तिथि तो नहीं है मगर इनके मिलन की तिथि महाशिवरात्रि अवश्य लोक प्रसिद्ध है। यह पवित्र रात्रि सृजन का प्रतीक है। शिव सिखाते हैं गृहस्थी सृजन से, मिलन से, पर्व से महकती है। गृहस्थों के आदर्श गौरीशंकर
** गृहस्थों के आदर्श गौरीशंकर
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<area shape="rect" class="borderimage" coords="560.149606944444,81.97492925,628.259606944444,131.59492925" href="javascript:void(0);" onclick="return show_pop(
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