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प्रतीकात्मक तस्वीर। प्रतीकात्मक तस्वीर। पाक एक्टिविस्ट परवीन रहमान पाक एक्टिविस्ट परवीन रहमान सलीम जावेद की जोड़ी ने करीब 12 साल साथ में काम किया। सलीम (दाएं), जावेद (बाएं)। सलीम जावेद की जोड़ी ने करीब 12 साल साथ में काम किया। सलीम (दाएं), जावेद (बाएं)। सलीम-जावेद की जोड़ी टूटने के बाद अख़बारों और रिसालों में तरह-तरह की बातें लिखी गईं। तरह-तरह के क़यास लग सलीम-जावेद की जोड़ी टूटने के बाद अख़बारों और रिसालों में तरह-तरह की बातें लिखी गईं। तरह-तरह के क़यास लगाए गए। कुछ बातें ऐसी भी हैं जिनसे सलीम ख़ान के दिल को चोट भी पहुंची। लेकिन वक़्त ने सच्चाई को रोशनी दी और ज़माने पर ज़ाहिर किया दोनों की अपनी-अपनी क़ाबिलियत क्या थी। और दो क़ाबिल इंसानों के जोड़ से बनी थी जोड़ी- सलीम जावेद।रही बात निजी सम्बंधों की तो जावेद ने हमेशा सलीम को अपने बड़े भाई के तौर पर देखा और उतनी ही इज़्ज़त भी दी। जावेद के किसी वक़्त के एक पत्रकार मित्र अली पीटॅर जान, अंग्रेज़ी अख़बार ‘स्क्रीन’ के रिपोर्टर होते थे। उन्होंने अपने संस्मरण लिखते हुए बताया है कि एक बार बम्बई के प्रसिद्ध होटल सन-एन-सैंड में किसी ने उनके जोड़ीदार सलीम ख़ान के बारे में कोई ऐसी-वैसी बात कह दी। उसके बाद का ब्यौरा अली पीटर जान की ज़बानी।‘मुझे वह शाम अब तक बख़ूबी याद है। जावेद के सामने बार में बैठे किसी शख़्स ने उनके पार्टनर सलीम के बारे में कोई ऐसी बुरी बात कह दी कि जावेद अपना आपा खो बैठे। वे इस क़दर बिफ़र उठे कि बार के तमाम गिलास और दीगर सामान को चकनाचूर कर दिया। और तो और होटल के लान तक उन्होंने कोहराम मचा दिया। अगले दिन बतौर पछतावा उन्होंने होटल जाकर सारे नुक्सान का भुगतान भी कर दिया।’दुनिया के हर रिश्ते में उतार-चढ़ाव तो आते ही हैं, लेकिन वह रिश्ता सबसे ख़ूबसूरत होता है जो हर उतार-चढ़ाव के बावजूद अपनी पाकीज़गी नहीं खोता। दुआ करता हूं कि दुनिया के हर रिश्ते में यह पाकीज़गी बनी रहे। कहिये-आमीन। मैं कहूंगा सुम आमीन।इसके बाद इस वादे और इरादे के साथ कि अगले हफ़्ते फिर से मिल बैठेंगेे, छेड़ने कोई अगली बात- जो होगी यक़ीनन अपनी आपस की बात।जय-जय। इधर सलीम ख़ान भी एक्टिंग की बजाय राइटिंग की तरफ़ जाने को बेचैन थे। उस दौर के मशहूर राइटर अबरार अल्वी क इधर सलीम ख़ान भी एक्टिंग की बजाय राइटिंग की तरफ़ जाने को बेचैन थे। उस दौर के मशहूर राइटर अबरार अल्वी के साथ काम वाली बात तो बता ही चुका हूं। अब बताने की बात सिर्फ़ इतनी है कि सलीम ख़ान और जावेद अख़्तर के बीच दोस्ताना तो 1966 में ही हो गया था लेकिन दोनों ही अलग-अलग फ़िल्म राइटर बनने की कोशिश में जुटे हुए थे। इस मामले में पहली कामयाबी मिली सलीम ख़ान को। उनकी एक कहानी ‘दो भाई’ अशोक कुमार को पसंद आई और उन्होंने इस पर फ़िल्म बनाने का इरादा कर लिया। काफ़ी अरसे तक जब वे इस इरादे पर अमल ना कर सके तो उन्होंने यह कहानी निर्देशक बृज सदाना को दे दी। बृज ने इस कहानी पर फिल्म बनाई ‘दो भाई’ जो 1969 में रिलीज़ हुई। पर्दे पर नाम आया- स्टोरी- प्रिंस सलीम। अशोक कुमार, जीतेंद्र, माला सिन्हा और शेख़ मुख़्तार जैसे सितारों के बावजूद फ़िल्म नाकाम रही।सलीम ख़ान ने नाकामी को नाउम्मीदी में तब्दील होने नहीं दिया। एक और कहानी तैयार की। यह फ़िल्म ‘ज़ंजीर’ की कहानी थी। बता चुका हूं कि यह कहानी पसंद कर-कर के कई लोगों ने ले ज़रूर ली लेकिन बात उससे आगे नहीं बढ़ पाई। सलीम ख़ान की इस कथा पर फ़िल्म बनाने के इरादे से बाकायदा पैसा देकर काम शुरू करने की नीयत रखने वालों में एक नाम है धर्मेंद्र का।बहरहाल, होना तो वही था जो होना था। सलीम और जावेद आख़िर एक दिन फिर साथ हुए सिप्पी फ़िल्म्स के स्टोरी डिपार्टमेंट में 750 रुपए माहना की नौकरी पर। यहीं पर, यूं ही साथ चलते-चलते, बन गई जोड़ी सलीम जावेद की। एक जोड़ी जिसने फ़िल्म इतिहास के पन्नों पर अपने हाथों लिखकर छोड़ दिया- लेखक का दर्जा बहुत ऊपर होता है। फिर ज़माने के हर शख़्स ने इस बात की ताईद में दस्तख़्त करके इस तहरीर को तारीख़ के इस वर्क़ को एक सुनहरी वर्क़ में तब्दील कर दिया।और...सलीम-जावेद की जोड़ी टूटने के बाद अख़बारों और रिसालों में तरह-तरह की बातें लिखी गईं। तरह-तरह के क़यास लगाए गए। कुछ बातें ऐसी भी हैं जिनसे सलीम ख़ान के दिल को चोट भी पहुंची। लेकिन वक़्त ने सच्चाई को रोशनी दी और ज़माने पर ज़ाहिर किया दोनों की अपनी-अपनी क़ाबिलियत क्या थी। और दो क़ाबिल इंसानों के जोड़ से बनी थी जोड़ी- सलीम जावेद। मिसाल ले लें तो यह किसी भी शब्दकोश में चुलबुला के अर्थ में- चंचल, चपल, नटखट, मसख़रा जैसे अर्थ मिलेंगे मिसाल ले लें तो यह किसी भी शब्दकोश में चुलबुला के अर्थ में- चंचल, चपल, नटखट, मसख़रा जैसे अर्थ मिलेंगे तो वहीं पाजी, चालाक और दुष्ट भी मिलेंगे। सो जा की रही भावना जैसी। हियां चुल मचने का अर्थ मन का मचलना है। तो मन मचल गया है एस.एम. सागर की बात करने को। जावेद अख़्तर की ही तरह उनका भी भोपाल से एक अटूट सा रिश्ता था। वे अपने दौर के महान अभिनेता अशोक कुमार के सेक्रेट्री होते थे। प्रोड्यूसर और डायरेक्टर भी होते थे। उनकी फ़िल्मों में अक्सर ही अशोक कुमार के अलावा स्थाई रूप से कोई ना कोई भोपाली भी ज़रूर होता था। ‘तू नहीं और सही’(60) में गीतकार असद भोपाली, ‘उस्तादों के उस्ताद’(63) में शकीला बानो भोपाली और असद भोपाली, ‘आंसू बन गए फूल’(69) में ताज भोपाली। 1971 की उनकी फ़िल्म ‘अधिकार’ में कुछ ना हुआ तो उन्होंने प्राण को बन्ने ख़ां भोपाली बनाकर ही तसल्ली कर ली। याद आया, सूरमा भोपाली से भी 4 बरस पहले पर्दे पर ‘ऐसी चीज़ सुनाएं कि महफ़िल दे ताली पे ताली / वरना अपना नाम नहीं है बन्ने ख़ां भोपाली।’आप कहोगे कि ख़ां लम्बी फैला दी। तो उसकी वजह है। वजह यह कि इस फ़िल्म से बिना नाम ही सही जावेद अख़्तर जुड़े हुए थे। अब फिर वही कि मिझे पुख़्ता तोर पे मालूम-वालूम नईं हे लेकिन कुछ चीज़ें समझने की होती हैं। तो जानम समझा करो।इधर सलीम ख़ान भी एक्टिंग की बजाय राइटिंग की तरफ़ जाने को बेचैन थे। उस दौर के मशहूर राइटर अबरार अल्वी के साथ काम वाली बात तो बता ही चुका हूं। अब बताने की बात सिर्फ़ इतनी है कि सलीम ख़ान और जावेद अख़्तर के बीच दोस्ताना तो 1966 में ही हो गया था लेकिन दोनों ही अलग-अलग फ़िल्म राइटर बनने की कोशिश में जुटे हुए थे। इस मामले में पहली कामयाबी मिली सलीम ख़ान को। उनकी एक कहानी ‘दो भाई’ अशोक कुमार को पसंद आई और उन्होंने इस पर फ़िल्म बनाने का इरादा कर लिया। काफ़ी अरसे तक जब वे इस इरादे पर अमल ना कर सके तो उन्होंने यह कहानी निर्देशक बृज सदाना को दे दी। बृज ने इस कहानी पर फिल्म बनाई ‘दो भाई’ जो 1969 में रिलीज़ हुई। पर्दे पर नाम आया- स्टोरी- प्रिंस सलीम। अशोक कुमार, जीतेंद्र, माला सिन्हा और शेख़ मुख़्तार जैसे सितारों के बावजूद फ़िल्म नाकाम रही। इस वक़्त मुझे ज़रा एक चुल सी मच रही है। मतलब मेन श्टोरी छोड़कर एस.एम. सागर के बारे में ज़रा सी, एक नन्ही इस वक़्त मुझे ज़रा एक चुल सी मच रही है। मतलब मेन श्टोरी छोड़कर एस.एम. सागर के बारे में ज़रा सी, एक नन्ही-मुन्नी सी बात करने की चुल। अब कोई इस ‘चुल’ को लेकर खुपड़िया ना खुजाने लगे या फिर मुंह पर हाथ रख ले कि अरे!... सो ऐसे लोगों की सेहत की बेहतरी के लिए अर्ज़ कर दूं कि एक ही लफ़्ज़ अच्छा भी हो सकता है और बुरा भी। सब कुछ निर्भर करता है कहने वाले की नीयत और अंदाज़ पर। यह बात किसी नकचढ़े नाना की बजाय चुलबुला चंदू ज़्यादा आसानी से समझ लेगा।मिसाल ले लें तो यह किसी भी शब्दकोश में चुलबुला के अर्थ में- चंचल, चपल, नटखट, मसख़रा जैसे अर्थ मिलेंगे तो वहीं पाजी, चालाक और दुष्ट भी मिलेंगे। सो जा की रही भावना जैसी। हियां चुल मचने का अर्थ मन का मचलना है। तो मन मचल गया है एस.एम. सागर की बात करने को। जावेद अख़्तर की ही तरह उनका भी भोपाल से एक अटूट सा रिश्ता था। वे अपने दौर के महान अभिनेता अशोक कुमार के सेक्रेट्री होते थे। प्रोड्यूसर और डायरेक्टर भी होते थे। उनकी फ़िल्मों में अक्सर ही अशोक कुमार के अलावा स्थाई रूप से कोई ना कोई भोपाली भी ज़रूर होता था। ‘तू नहीं और सही’(60) में गीतकार असद भोपाली, ‘उस्तादों के उस्ताद’(63) में शकीला बानो भोपाली और असद भोपाली, ‘आंसू बन गए फूल’(69) में ताज भोपाली। 1971 की उनकी फ़िल्म ‘अधिकार’ में कुछ ना हुआ तो उन्होंने प्राण को बन्ने ख़ां भोपाली बनाकर ही तसल्ली कर ली। याद आया, सूरमा भोपाली से भी 4 बरस पहले पर्दे पर ‘ऐसी चीज़ सुनाएं कि महफ़िल दे ताली पे ताली / वरना अपना नाम नहीं है बन्ने ख़ां भोपाली।’ 1958 में सलीम ख़ान बम्बई पहुंचे और 1964 में जावेद अख़्तर। एक इंदौर से बम्बई और दूसरा भोपाल से बम्बई। त 1958 में सलीम ख़ान बम्बई पहुंचे और 1964 में जावेद अख़्तर। एक इंदौर से बम्बई और दूसरा भोपाल से बम्बई। तकरीबन 200 किलोमीटर के फ़ासले पर बसे इन दो शहरों की तरह ही इन दो किरदारों की बीच का फ़ासला भी उतना ही था- 200 किलोमीटर। इस फ़ासले को मिटना था तो दोनों अपने-अपने फ़ासले से एक तीसरी जगह जा पहुंचे- पहला पहले और दूसरा बाद में।1966 में दोनों का पहली बार आमना-सामना हुआ। यह मौका पैदा हुआ एस. एम. सागर की फ़िल्म ‘सरहदी लुटेरा’ की शूटिंग के दौरान। इस फ़िल्म में सबसे अहम किरदार था शेख़ मुख़्तार का और रोमांटिक जोड़ी थी सलीम ख़ान और एक नई हीरोइन सुनीता की। जावेद अख़्तर इस फ़िल्म से जुड़े तो थे बतौर क्लैपर ब्वाय लेकिन एस. एम. सागर की मुश्किलों को आसान करने की गरज़ से उन्होंने फ़िल्म के कुछ डायलाग भी लिखे और कलाकारों को डायलाग सिखाए भी।इसी फ़िल्म में सलीम ख़ान और सुनीता के बीच बोली गई चंद लाइनें हैं, जिन्हें सुनकर ना जाने क्यों मुझे लगता है कि यह असल में सलीम ख़ान और जावेद अख़्तर के बीच के डायलाग हैं। बस इसमे ‘लगती’ को ‘लगता’ कर लीजिए।‘क्या बात है!- यह तो गुलबदन ने ज़बरदस्ती पहना दिए हैं...कैसी लगती हूं?- पहले बहुत दूर लगती थीं, अब बहुत पास लगती हो।- क्या मतलब?- आज तक पराई लगती थीं, अब अपनी दिखाई देती हो।’ख़ुदा जाने यह लाइनें किसकी लिखी हैं। पर्दे के पीछे बहुत कुछ होता रहता है जो पीछे का पीछे ही रह जाता है, सो दावे से कुछ भी कहना जहालत होगी। फ़िल्म तो ख़ैर जितनी चलनी थी उतनी ही चली और चलकर रह गई, अलबता सलीम ख़ान और जावेद अख़्तर की दोस्ती चल पड़ी। {दो थैलेसीमिया पॉजिटिव लोगों को शादी नहीं करनी चाहिए?ऐसा बिल्कुल नहीं है। दोनों शादी कर सकते हैं, बस {दो थैलेसीमिया पॉजिटिव लोगों को शादी नहीं करनी चाहिए?ऐसा बिल्कुल नहीं है। दोनों शादी कर सकते हैं, बस गर्भधारण के बाद 10-12 हफ्ते के बीच सीवीएस टेस्ट करवा लेना चाहिए, ताकि समय रहते सही कदम उठाए जा सकें। {थैलेसीमिया मेज़र के लिए खून मुश्किल से मिलता है?यह कोरी भ्रांति है। खून आसानी से मिलता है, बस रक्त च {थैलेसीमिया मेज़र के लिए खून मुश्किल से मिलता है?यह कोरी भ्रांति है। खून आसानी से मिलता है, बस रक्त चढ़वाने वाले लोगों को किसी तरह के संक्रमण से बचने के लिए ब्लड चढ़वाते समय ल्यूकोसाइट फिल्टर्स का इस्तेमाल करना चाहिए। {	सेक्शन 24 के तहत हाउस प्रॉपटी की आय पर, बशर्ते हाउस प्रॉपटी को आपने किराये पर दे रखा हो।{	80CCD (2 {	सेक्शन 24 के तहत हाउस प्रॉपटी की आय पर, बशर्ते हाउस प्रॉपटी को आपने किराये पर दे रखा हो।{	80CCD (2) के तहत एनपीएस में नियोक्ता के योगदान पर।{	रिटायरमेंट के बाद एनपीएस से निकासी पर। या एनपीएस से आंशिक निकासी पर।{	5 साल की सेवा के बाद ईपीएफ से निकासी पर।{	पीपीएफ और सुकन्या समृद्धि अकाउंट के मैच्योर होने के बाद मिलने वाली मैच्योरिटी की राशि (ब्याज सहित) पर।{जीवन बीमा पॉलिसी की अवधि पूरी होने के बाद मिलने वाले सम एश्योर्ड व बोनस पर।{अपने नियोक्ता से मिलने वाले अधिकतम 20 लाख रुपए तक की ग्रेच्युटी की राशि पर।{वॉलंटरी रिटायरमेंट लेने वालों को रिटायरमेंट के वक्त मिलने वाली एकमुश्त अधिकतम 5 लाख रुपए तक की रकम पर।{रिटायरमेंट या नौकरी छोड़ने के समय अधिकतम तीन लाख रुपए तक के लीव इनकैशमेंट पर।{पोस्ट ऑफिस में खाताधारकों को एक वित्त वर्ष में इंडिविजुअल बचत खाते पर मिलने वाले अधिकतम 3,500 रुपए जबकि ज्वाइंट अकाउंट के मामले में 7,000 रुपए तक के ब्याज पर छूट का फायदा मिलता रहेगा। नई टैक्स व्यवस्था में भी कौन-से फायदे मिलेंगे? नई टैक्स व्यवस्था में भी कौन-से फायदे मिलेंगे? दूसरों की ज़िंदगी के लिए लड़ी जंग दूसरों की ज़िंदगी के लिए लड़ी जंग यह सब कहते हुए मुझे लियो टॉलस्टाय की वो कहानी याद आती है, जो उन्होंने 1886 में लिखी थी, जिसका कई ज़ब यह सब कहते हुए मुझे लियो टॉलस्टाय की वो कहानी याद आती है, जो उन्होंने 1886 में लिखी थी, जिसका कई ज़बानों में तर्जुमा हुआ। 20वीं सदी में उर्दू में भी इसका तर्जुमा हुआ। किसी ने उसका नाम दो बीघा जमीन रखा, तो किसी ने दो गज़ ज़मीन। इस कहानी का मरकजे ए ख्याल ज़मीन के लिए इंसान की ख़त्म न होने वाली हवस था। कहानी में एक शख़्स है, जिससे कहा जाता है कि वो सूरज डूबने तक जितनी ज़मीन तय करेगा अगले रोज़ वो उसके नाम कर दी जाएगी। यह सुनकर वो शख़्स चलने के बजाय दौड़ने लगता है। सूरज डूबने तक वह बहुत बड़ा रास्ता तय कर लेता है, लेकिन इस दौरान वो निढाल हो चुकता है और आखिर में गिरकर ख़त्म हो जाता है। तब टॉलस्टाय एक सवाल उठाते हैं कि एक इंसान को आख़िर कितनी ज़मीन की जरूरत है? इस सवाल का जवाब भी इस कहानी में मौजूद है कि हर इंसान की जिं़दगी के खात्मे पर सिर्फ दो गज़ ज़मीन की दरकार होती है, जिसमें वो दफ़्न कर दिया जाता है।परवीन बांग्लादेश बनने के बाद अपने खानदान के साथ कराची पहुंची तो तिनका-तिनका जोड़कर अपना आशियाना बनाया। परवीन ने आर्किटेक्चर की पढ़ाई की। बाद में नीदरलैंड्स के रॉटरडम स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ हाउंसिंग स्टडीज़ से पढ़ाई की। इसके बाद वह वापस पाकिस्तान आ गईं। वह चाहतीं तो दूसरे पाकिस्तानियों की तरह लाखों-करोड़ों कमाकर अच्छा जीवन जी सकती थीं। पाकिस्तान लौटकर वह पाकिस्तान के मशहूर सोशल साइंटिस्ट अख्तर हमीद खान के औरंगी पायलट प्रोजेक्ट से जुड़ गईं। वह खान साहब को अपना गुरु कहती थीं। परवीन को उन लोगों ने निशाना बनाया, जो लोगों को आराम से जीने का हक़ नहीं देना चाहते। परवीन रहमान बहुत मशहूर थीं। हम उनके लिए दुआ कर सकते हैं। दुआ यह भी कर सकते हैं कि ऐसे लोग पैदा हों जो अपने बारे में नहीं गरीबों के बारे में भी सोचें।पिछले दिनों मैं बहुत बीमार रही। इसलिए नियमित नहीं लिख पाई। मैं इस मुल्क में मौजूद अपने पढ़ने वालों का साथ नहीं छोड़ना चाहती। मेरी सेहत के लिए भी दुआ करें। 6. क्या है इसका इलाज?थैलेसीमिया से ग्रसित बच्चे भी अच्छा जीवन जी सकते हैं। बस उनकी उचित देखभाल की जर 6. क्या है इसका इलाज?थैलेसीमिया से ग्रसित बच्चे भी अच्छा जीवन जी सकते हैं। बस उनकी उचित देखभाल की जरूरत होती है। बच्चे मेें जैसे ही बीमारी का पता चले, बिना देर किए लाल रक्त कोशिकाओं की जरूरत पूरी करनी चाहिए। रक्त में आरबीसी की सही मात्रा से हीमोग्लोबिन का स्तर 9 ग्राम/डीएल बना रहता है। इसका स्थायी इलाज बोनमैरो ट्रांसप्लांट से ही संभव है। इसके लिए हेल्दी बोन मैरो की जरूरत होती है। इसके लिए एचएलए यानी कि जीन का 100 फीसदी मिलना जरूरी है। भाई-बहन और माता-पिता इसके लिए आदर्श डोनर माने जाते हैं। हालांकि, जीन अगर 50 फीसदी भी मिल रहा है, तो अब बोनमैरो ट्रांसप्लांट किया जा सकता है। 4. कौन से टेस्ट करवाएं?हीमोग्लोबिन इलेक्ट्रोफोरेसिस टेस्ट या हाई परफॉरमेंस लिक्विड क्रोमोटोग्राफी से 4. कौन से टेस्ट करवाएं?हीमोग्लोबिन इलेक्ट्रोफोरेसिस टेस्ट या हाई परफॉरमेंस लिक्विड क्रोमोटोग्राफी से इसका टेस्ट होता है। हर माता-पिता को अपनी जेनेटिक टेस्टिंग जरूर करवानी चाहिए, ताकि थैलेसीमिया के बारे में पता चल सके।5. इसके लक्षण क्या हैं?थैलेसीमिया से ग्रसित बच्चों के शरीर में धीरे-धीरे पीलापन बढ़ता जाता है। बच्चे चिड़चिड़े होते जाते हैं, भूख बहुत कम हो जाती है। स्तनपान भी कम कर देते हैं, नतीजतन उनका वज़न बढ़ना भी कम हो जाता है। ऐसे बच्चों का पेट भी सामान्य बच्चों की तुलना में बढ़ा हुआ होता है। 1. क्या है थैलेसीमिया?यह रक्त से जुड़ी हुई आनुवंशिक बीमारी है। इससे पीड़ित व्यक्ति के रक्त में हीमोग्ल 1. क्या है थैलेसीमिया?यह रक्त से जुड़ी हुई आनुवंशिक बीमारी है। इससे पीड़ित व्यक्ति के रक्त में हीमोग्लोबिन की मात्रा कम होती है। रक्त में लाल रक्त कोशिकाएं (आरबीसी) भी बेहद कम बनती हैं। इससे मरीज़ को एनीमिया हो जाता है। थैलेसीमिया दो तरह का होता है- माइनर और मेजर। माइनर गंभीर नहीं होता। कभी-कभी माइनर के रोगियों को जि़ंदगीभर भी रोग के बारे में पता नहीं चल पाता। मेजर के भी दो प्रकार होते हैं- अल्फा और बीटा।2. किन्हें हो सकती है बीमारीथैलेसीमिया जेनेटिक बीमारी है, मतलब माता-पिता में से किसी को है, तो ही बच्चे को यह बीमारी हो सकती है। अगर माता-पिता में से किसी एक को थैलेसीमिया है, तो बच्चे को माइनर थैलेसीमिया हो सकता है। लेकिन अगर माता-पिता दोनों को थैलेसीमिया है तो 25 प्रतिशत बच्चों को मेजर थैलेसीमिया होने की आशंका होती है। इसमें 25 प्रतिशत बच्चे सामान्य हो सकते हैं। वहीं 50 प्रतिशत को माइनर थैलेसीमिया की आशंका होती है।3. क्या इससे बच सकते हैं?बच्चे में थैलेसीमिया का संक्रमण रोका जा सकता है, बशर्ते माता-पिता वक्त रहते अपनी जांच करवाएं। गर्भधारण से 12 हफ्ते तक अगर माता-पिता के थैलेसीमिया वाहक होने का पता चल जाए, तो डॉक्टरी सलाह से इसका इलाज किया जा सकता है। पति-पत्नी को थैलेसीमिया है तो फिर 10 से 12 हफ्ते के भ्रूण की क्रोनिक विलस सेंपलिंग (सीवीएस) टेस्ट किया जाता है। यह टेस्ट भ्रूण में किसी तरह के जेनेटिक डिसऑर्डर का पता लगाने के लिए किया जाता है। बच्चे के बारे में सोच रहे हर दंपती को, फिर चाहे वह थैलेसीमिया से ग्रसित हों या या ना हों, अपना यह टेस्ट जरूर करवाना चाहिए। माता-पिता से बच्चे को हो सकता है थैलेसीमिया माता-पिता से बच्चे को हो सकता है थैलेसीमिया ‘ऐसी चीज़ सुनाएं कि महफ़िल दे ताली पे ताली’ ‘ऐसी चीज़ सुनाएं कि महफ़िल दे ताली पे ताली’ शुभ मुहूर्त शुभ मुहूर्त एेसा क्यों एेसा क्यों छिन्नमस्तिका जयंती- 6 मई को छिन्नमस्तिका जयंती है। महाप्रलय का ज्ञान कराने वाली यह महाविद्या भगवती त छिन्नमस्तिका जयंती- 6 मई को छिन्नमस्तिका जयंती है। महाप्रलय का ज्ञान कराने वाली यह महाविद्या भगवती त्रिपुरसुंदरी का ही रौद्र रूप है। यह दस महाविद्याओं में से एक है। अपने कटे हुए स्कन्ध से रक्त की जो धाराएं निकलती हैं, उनमें से एक को स्वयं पीती हैं और अन्य दो धाराओं से अपनी वर्णिनी और शाकिनी नाम की दो सहेलियों को तृप्त कर रही हैं। 04 मई - मोहिनी एकादशी (स्मार्त एवं वैष्णव)05 मई - भौम प्रदोष व्रत07 मई - स्नानदान, व्रत की वैशाखी पू 04 मई - मोहिनी एकादशी (स्मार्त एवं वैष्णव)05 मई - भौम प्रदोष व्रत07 मई - स्नानदान, व्रत की वैशाखी पूर्णिमा09 मई - नारद जयंती 04 मई- नामकरण, कर्णवेध, गृहप्रवेश (सवेरे 9.15 से 10.30 तक)07 मई- प्रसूति का स्नान, देवप्रतिष्ठा, जला 04 मई- नामकरण, कर्णवेध, गृहप्रवेश (सवेरे 9.15 से 10.30 तक)07 मई- प्रसूति का स्नान, देवप्रतिष्ठा, जलाशय निर्माण (दिन में 12.05 से 1.35 तक)09 मई- गृहारंभ, गृहप्रवेश, देवप्रतिष्ठा (सुबह 07.35 से सुबह 09.15 तक) शनि की दृष्टि है। विचार करके कार्य नहीं करने से कार्यों में बदलाव होगा एवं एक ही कार्य को कई बार करन शनि की दृष्टि है। विचार करके कार्य नहीं करने से कार्यों में बदलाव होगा एवं एक ही कार्य को कई बार करना पड़ सकता है। अत: सावधानी रखें एवं वरिष्ठों का सहयोग लेते रहें। मध्य में आत्मविश्वास बढ़ेगा एवं फिर किसी परेशानी का सामना नहीं करना होगा। चंद्र का गोचर उत्साह, साहस एवं धर्म की वृद्धि करने वाला सप्ताह होगा। कई अटके कार्यों के होने से आनंद चंद्र का गोचर उत्साह, साहस एवं धर्म की वृद्धि करने वाला सप्ताह होगा। कई अटके कार्यों के होने से आनंद एवं हर्ष रहेगा। नई संपत्ति के खरीदने की योजना बनेगी एवं कार्य का विस्तार होगा। मध्य भी अनूकुल बना रहेगा उत्तरार्ध में व्यय संबंधी परेशानी आ सकती है। मध्यस्थता करने से बचें, बातों का विपरीत अर्थ निकाला जा सकता है। भलाई करने जाएंगे तो बुराई होगी। विरो मध्यस्थता करने से बचें, बातों का विपरीत अर्थ निकाला जा सकता है। भलाई करने जाएंगे तो बुराई होगी। विरोधियों के प्रति अतिरिक्त सतर्कता लाभकारी होगी। माता को स्वास्थ्य संबंधी समस्या हो सकती है। व्यय बना रहेगा एवं आय के मामलों में कमजोरी आएगी। सप्ताह की शुरुआत अति उत्तम रहेगी। धनलाभ बना रहेगा एवं किसी प्रकार की परेशानी से बचे रहेंगे। कार्य सम सप्ताह की शुरुआत अति उत्तम रहेगी। धनलाभ बना रहेगा एवं किसी प्रकार की परेशानी से बचे रहेंगे। कार्य समय पर होंगे। योजनाओं को ठीक ढंग से क्रियान्वित कर पाएंगे। निर्माण संबंधी मामलों में परेशानी हो सकती है। दूसरों पर अत्यधिक भरोसा भी नुकसानदायक है। चंद्र के द्वादश होने के बावजूद कार्य आसानी से बन रहे हैं एवं कुछ सुखद सूचनाएं मिल सकती हैं। विविध प् चंद्र के द्वादश होने के बावजूद कार्य आसानी से बन रहे हैं एवं कुछ सुखद सूचनाएं मिल सकती हैं। विविध प्रकार के कार्य करने का मौका मिलेगा। आपकी दूरंदेशी कई प्रकार के लाभ दिलाएगी। आत्मविश्वास बना रहेगा एवं जमीन-जायदाद से लाभ के अवसर बनेंगे। जमीन संबंधी मामलों में लाभ होगा। जो भी कार्य करेंगे, उसमें अप्रत्याशित सफलता प्राप्त होगी। हर कार्य जमीन संबंधी मामलों में लाभ होगा। जो भी कार्य करेंगे, उसमें अप्रत्याशित सफलता प्राप्त होगी। हर कार्य निर्विघ्न समाप्त होंगे। मध्य में सावधानी रखना ठीक होगा विशेषकर वाहन संचालन एवं घर से बाहर के मामलों में। उत्तरार्ध भाग्य पक्ष का बनेगा एवं आपको फिर से सफलताएं प्राप्त होंगी। व्यय की अधिकता रहने की संभावना है। रोग वृद्धि हो सकती है। शुरुआत में परेशानी होगी, मध्य काल में सुधा व्यय की अधिकता रहने की संभावना है। रोग वृद्धि हो सकती है। शुरुआत में परेशानी होगी, मध्य काल में सुधार होगा एवं अंत में लाभकारी स्थिति में आ जाएंगे। अन्य कार्यों में भी सफलता मिलेगी। मित्रों से तनाव हो सकता है। प्रोफेशन-नौकरी एवं व्यापार के लिए सप्ताह अच्छा होगा। आत्मविश्वास में वृद्धि होगी एवं किसी बड़े कार्य के मिलने के आसार बनेंगे। जमीन-जायदाद संबंधी मामलों म आत्मविश्वास में वृद्धि होगी एवं किसी बड़े कार्य के मिलने के आसार बनेंगे। जमीन-जायदाद संबंधी मामलों में लाभ होगा एवं लंबित कार्य पूर्णता की ओर बढ़ेंगे। पार्टनर के साथ वैचारिक मतभेद हो सकता है एवं आपका आलस्य कई जगहों पर नुकसानदायक हो सकता है। चंद्र की पूर्ण दृष्टि से संकट से उबरने का मौका मिलेगा एवं तत्पश्चात आपको पूरे समय कोई परेशानी नहीं आ चंद्र की पूर्ण दृष्टि से संकट से उबरने का मौका मिलेगा एवं तत्पश्चात आपको पूरे समय कोई परेशानी नहीं आएगी। भाग्य का साथ आपको मनचाही वस्तुएं प्रदान करेगा। व्यस्तता बनी रहेगी। इस समय आपकी गुप्त बातों के प्रकट होने का भय भी बना रहेगा। चंद्र शुरुआती सफलताएं दिलाएगा। विशेषकर सरकारी कामकाजों में उन्नति होगी। जीवन साथी के साथ सुखपूर्वक स चंद्र शुरुआती सफलताएं दिलाएगा। विशेषकर सरकारी कामकाजों में उन्नति होगी। जीवन साथी के साथ सुखपूर्वक समय व्यतीत होगा। मित्रों एवं संबंधियों से प्रेमपूर्ण व्यवहार रहेगा। मध्य काल में अनावश्यक व्यय होगा एवं उत्तरार्ध में आय में वृद्धि के आसार हैं। शुरुआत लाभकारी होगी। खुशखबरी प्राप्त होगी एवं सहयोगियों के साथ तालमेल उत्तम बना रहेगा। संतान से सहयो शुरुआत लाभकारी होगी। खुशखबरी प्राप्त होगी एवं सहयोगियों के साथ तालमेल उत्तम बना रहेगा। संतान से सहयोग एवं लाभ होगा। मध्यकाल में आपको धन संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। अचानक किसी अनावश्यक कार्य में भी उलझ सकते हैं। अतिरिक्त सफलता मिलने से उत्साह में वृद्धि होगी। सभी कार्य समय पर बनते जाएंगे। कार्य की अधिकता आपकी क अतिरिक्त सफलता मिलने से उत्साह में वृद्धि होगी। सभी कार्य समय पर बनते जाएंगे। कार्य की अधिकता आपकी क्षमता को प्रभावित नहीं कर पाएगी। संतान अनुकूल रहेगी एवं मित्रों से मिलने का अवसर प्राप्त होगा। अपने कार्यों को दूसरे पर छोड़ना अनर्थकारी होगा। मीन मीन मई में मंगल का कुंभ राशि में गोचर होने जा रहा है। इसी के साथ देश में फैली महामारी पर नियंत्रण आरंभ ह मई में मंगल का कुंभ राशि में गोचर होने जा रहा है। इसी के साथ देश में फैली महामारी पर नियंत्रण आरंभ हो जाएगा। व्यापारिक स्थितियां ठीक होने लगेंगी एवं प्रकृति भी अनुकूल हो जाएगी। मकर राशि में शनि-गुरु की युति 59 वर्ष बाद शेष रहेगी। साप्ताहिक राशिफल साप्ताहिक राशिफल मेष मेष तुला तुला कन्या कन्या तारे-सितारेपंडित मनीष शर्मा, ज्योतिषाचार्य तारे-सितारेपंडित मनीष शर्मा, ज्योतिषाचार्य िसंह िसंह मकर मकर कुंभ कुंभ कर्क कर्क धनु धनु वृषभ वृषभ िमथुन िमथुन वृश्चिक वृश्चिक पाकिस्तान डायरीज़ाहिदा हिना पाकिस्तान डायरीज़ाहिदा हिना वित्त प्रबंधनअजीत कुमारपर्सनल फाइनेंस एक्सपर्ट वित्त प्रबंधनअजीत कुमारपर्सनल फाइनेंस एक्सपर्ट सेहतडॉ. गौरव खरयासीनियर कंसल्टेंट इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल सेहतडॉ. गौरव खरयासीनियर कंसल्टेंट इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल आपस की बातराजकुमार केसवानी आपस की बातराजकुमार केसवानी 10 10 व्रत-पर्व व्रत-पर्व
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