X

My Bookmarks

X

Select Date

Date

OK
Your Choices Regarding Cookies

We and third parties may deploy cookies and similar technologies when you use our site. Please review the information below and select the cookies for enhancing your Site/ App experience. However, you can change your consent choices at anytime by clicking “withdraw consent” from Hamburger menu/ left menu drawer on the Site/ App.

Web analytics

We use cookies to analyze and measure traffic to the site so that we know our audience and can improve our site, determine what stories are read, preferred news edition, default setting for the preferred news edition/ bookmarked news, where visitors come from, and how long they stay. Opt-In to these analytics cookies by clicking enable.

Content recommendation and personalization

We use third-party services for enabling your successful registration/subscription to E-paper module, to provide newsletters, content recommendations and customize your user experience and advertising. Opt-In to these content recommendation cookies by clicking enable. Please read our Cookie Policy and Privacy Policy for more details

Continue
Please Confirm

Are you sure you want to continue?

Download PDF

PDF Download option will be available after 12 PM only.

OK
Loading....
12

आपकी ट्रायल अवधि के 18528 दिन शेष

कृपया अपना खाता सत्यापित करने के लिए अपनी वैध ईमेल आईडी दर्ज करें
X

भेंट की पहचान - मीठाकिसी समय सिर्फ जमींदारों या नवाबों के यहां बनने वाली बेलगरामी अब कोआथ बाज़ार और स भेंट की पहचान - मीठाकिसी समय सिर्फ जमींदारों या नवाबों के यहां बनने वाली बेलगरामी अब कोआथ बाज़ार और सामाजिक सौहार्द की पहचान है। खानपान विशेषज्ञ नवल किशोर ओझा कहते हैं कि नवाबों की हवेली और बावर्चीखाने से निकली ये मिठाई अब हर शुभ अवसर पर दिया जाने वाला सबसे खास तोहफा बन गई है। आज सबसे ज्यादा जरूरतकोरोना वायरस के इस समय में जीवन, सेहत, नौकरी, व्यापार और भविष्य की ढेर सारी चिंत आज सबसे ज्यादा जरूरतकोरोना वायरस के इस समय में जीवन, सेहत, नौकरी, व्यापार और भविष्य की ढेर सारी चिंताएं हैं। मैं दृढ़ता से मानता हूं कि इस अवधि में वरी जर्नल आपके काम आएगा। इसे आप गोपनीय जगह पर रख सकते हैं और यदि आपको लगे कि उस चिंता का आपके लिए कोई अर्थ नहीं है, उस दिन आप डायरी से उस पेपर को फाड़ दीजिए। इस तरीके से आप रहस्य खुलने के डर और चिंताओं के भारी दबाव से भी मुक्त होंगे। रविवार, 2 अगस्त 2020 रविवार, 2 अगस्त 2020 बात पते की... बात पते की... बजेगा हि ंदी का डंका बजेगा हि ंदी का डंका उद्यम से आत्मनिर्भरतावर्तमान अनिश्चितता के दौर में उद्यमी सोच की जरूरत है। यही आर्थिक सुरक्षा सुनिश् उद्यम से आत्मनिर्भरतावर्तमान अनिश्चितता के दौर में उद्यमी सोच की जरूरत है। यही आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करेगी।मुंबई के ग्रांट रोड के मामूली-से इलाके से शुरुआत करने वाले रॉनी स्क्रूवाला अपने परिवार के पहले सदस्य हैं, जिन्होंने उद्यम और कारोबार की दुनिया में कदम रखा। उन्होंने ही मीडिया और मनोरंजन जगत की जानी-मानी कंपनी, यूटीवी की बुनियाद रखी थी। रॉनी ने अपनी किताब, "सपने देखो खुली आंखों से ...कुछ करते रहने, चलते रहने के फैसले लेते समय दु‌विधा क्यों हो?असमंजस किसी सूरत न रहे...जीवन के हर क ...कुछ करते रहने, चलते रहने के फैसले लेते समय दु‌विधा क्यों हो?असमंजस किसी सूरत न रहे...जीवन के हर कदम पर ढेर सारे सवाल पीछा करते रहते हैं। चाहे कोई मोड़ सामने हो न हो, लेकिन सवाल रहते ही हैं। कोई काम करना है या नहीं, कैसे करना है, किस हद तक आज पूरा करना है, जैसे सवाल तो रहते ही हैं।हम मश्वरे भी बहुत करते हैं। दूसरों से पूछ कर कभी चैन मिलता है, तो कभी राह भी मिल जाती है, लेकिन दूसरों से पूछना भी तो दुविधा की ही स्थिति का एक पक्ष है।हाल ही में इससे संबंधित एक सलाह मिली, जिस पर तुरंत अमल करने से पहले काफी देर मंथन किया। सलाह कुछ यूं थी, ‘कुछ भी करने के लिए पहल करें, तो दुविधा के साथ नहीं। ख़ुद अपने मन में तय करें, फिर पूरे भरोसे के साथ कदम उठाएं। नतीजा जो भी हो, लेकिन आधार आपके अपने विश्वास का होना चाहिए और फिर फैसला भी। कोई भी काम अधूरे मन से न करें।’दुविधा के सामने से हट जाने से बड़ा इत्मीनान महसूस हुआ। सच है, फैसला करने में अड़चनें आना तो तय ही है, फिर अधूरे मन से कोई काम क्यों किया जाए। किसी एक तरफ तो जाना ही है, तो मज़बूत कदम क्यों न उठाए जाएं। इससे आत्मविश्वास भी प्रभावित होता है। असमंजस के दूर हो जाने से, जो थोड़ा अधूरापन प्रयास में रह जाता है, वो भी पास नहीं फटकता।इससे जुड़ी एक और उक्ति है, ‘अगर आप समाधान का हिस्सा नहीं हैं, तो निश्चित रूप से समस्या के पक्ष में हैं।’ हल का हिस्सा होने के लिए सकारात्मक पहल, मेहनत और काम को पूरा करने की लगन ही तो चाहिए, फिर कोई भी दुविधा, कोई समस्या, कोई चिंता कैसे टिक सकती है।सारी मुश्किलें पहल न करने से खड़ी होती हैं। जो चलते जाते हैं, उन्हें दिक्कतें नहीं होतीं ऐसा नहीं है, लेकिन वे सफर पर आगे तो बढ़ते हैं, कुछ हासिल तो करते हैं और यह सुकून दुविधा से दूर रखता है।
X