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बुद्ध और बापू को उकेरते महारथी बुद्ध और बापू को उकेरते महारथी अहं को आड़े हाथों लें!हमारी ज़िंदगी के हर फैसले, अपने और दूसरों के प्रति राय या किसी काम की पहल में जो अहं को आड़े हाथों लें!हमारी ज़िंदगी के हर फैसले, अपने और दूसरों के प्रति राय या किसी काम की पहल में जो सबसे बड़ा दख़ल रखता है, वो है हमारा अहं, हमारा ईगो। अपने वैचारिक उत्थान में ईगो को आड़े हाथों लेना ज़रूरी है।ह मारा अहं केवल ख़ास मामलों में ही सामने आता है- हमेशा नकारात्मक स्थितियों में उपस्थित होता है, हमारे स्वार्थी स्वभाव या दूसरों से बेहतर होने के नाज़ के कारण सामने आता है - अगर आप भी ऐसा मानते हैं, तो मशहूर लेखक एकहार्ट टोल्ल की बात आपको भी आत्मनिरीक्षण करने पर विवश करेगी। अहं या ईगो, हमारे जीवन के हर पहलू को प्रभावित करता है। कोई भी इंसान इससे अछूता नहीं है। अहं में इतनी ताकत होती है कि ये हमारी ज़िंदगी के हर छोटे-से छोटे फैसले को ग़लत दिशा में मोड़ सकता है।अहं एक लकीर खींच देता है, जो आपको दूसरों से अलग करती है। ‘ये मैं हूं और ये दूसरे लोग।’ ये अहं की ही कारस्तानी है। अहं दूसरों के बारे में बिना समझे राय बनाता है, ख़ुद के लिए ख़ास तरह के अच्छे व्यवहार की अपेक्षा पालने में मदद करता है। इसे झगड़े, मनमुटाव पसंद आते हैं। लोगों के रूठने से इसे कोई फर्क नहीं पड़ता। यह डर के पहियों पर चलता है। अहं हमारे जीवन के हर पहलू पर असर डालता है - हमारे मन में ख़ुद की छवि, व्यक्तित्व, हुनर, उपलब्धियां, हमारी मनगढ़ंत कमज़ोरियां - सबके सूत्र ईगो के हाथ में हैं। इससे निजात पाई जा सकती है। एकहार्ट सुझाते हैं कि जब भी अनचीन्ही स्थितियां बनने लगें, तो ईगो को टक्कर देने के लिए ख़ुद से कहें , ‘अरे, ये तो मेरा अहं है, जो फिज़ूल ही सिर उठा रहा है।’ अगर इसका अहसास कर पाए, तो अहं को कमज़ोर कर देंगे और हालात से आसानी से बाहर आ जाएंगे। अहसास हो जाएगा कि आपको ख़ुद के या किसी और के रूप-रंग, दौलत, उसके अतीत, उसकी सामाजिक स्थिति, शक्ति आदि से अप्रभावित रहकर चलना है। अहं को हराने की जादुई शक्ति हम सब में है। बोलने से ज्यादा महत्वपूर्ण है सुनने की कला बोलने से ज्यादा महत्वपूर्ण है सुनने की कला सत्य के वैज्ञानिक बापू सत्य के वैज्ञानिक बापू 1% का नियमहर दिन एक प्रतिशत सुधार करके क्या चमत्कार हो सकता है, बता रहे हैं टॉमी बेकर।संसार का सबसे 1% का नियमहर दिन एक प्रतिशत सुधार करके क्या चमत्कार हो सकता है, बता रहे हैं टॉमी बेकर।संसार का सबसे प्रेरित करने वाला साधन कौन-सा है? सोशल मीडिया का प्रेरक वीडियो? या कोई मोटीवेशनल सेमिनार? या उस पल की कल्पना, जब आप रेड कारपेट पर सीढ़ियां चढ़कर मंच पर पहुंचते हैं। नहीं, इनमें से कोई नहीं!एक निर्विवाद प्रेरक शक्ति है, जिससे प्रबल शक्ति दूसरी नहीं है: प्रगति और उसका एहसास। जब हम महसूस करते हैं कि हम जीवन में सुई को आगे बढ़ा रहे हैं, तो हम प्रेरित बने रहते हैं, भले ही परिवर्तन महत्वहीन नजर आता हो। प्रगति हमें प्रेरित और पटरी पर बनाए रखती है।1% का नियम इसी सिद्धांत से निकलता है और काइजेन नामक जापानी दर्शन से जुड़ता है। लंबे समय तक निरंतर सुधार करना इस दर्शन का सार है।1% के नियम का समीकरण है : 1% प्रगति + दैनिक अमल (निरंतरता) + लगन (एकाग्रता) + समय (सहनशक्ति) = सफलता।इसे जानने से पहले, मैं काम शुरू करने से पहले हर बार संकल्प लेता था कि इस बार नतीजे अलग होंगे। इस चालू-बंद के चक्र के बरसों बाद मैं एक आम प्रवृत्ति पर गौर करने लगा। मैंने देखा कि जब मैं ज्यादा बड़े स्वप्न से जुड़े छोटे-छोटे दैनिक कामों पर ध्यान केंद्रित करता था, तो मैं जोशीला व प्रेरित महसूस करता था और सुई हिला देता था। लेकिन जब मैं अंतिम परिणाम और अपने बुने हुए भव्य स्वप्न पर ध्यान केंद्रित करता था, तो मैं खोखला तथा अप्रेरित महसूस करता था और विश्लेषण के लकवे का शिकार हो जाता था।मैं 1% के नियम को विचार के रूप में कम और विज्ञान के रूप में ज्यादा देखने लगा। यह एक सरल सवाल से शुरू हुआ कि अगर मैं सुई को अपने जीवन के हर क्षेत्र में हर दिन 1% आगे बढ़ाऊं, तो एक साल बाद मेरा जीवन कैसा दिखेगा? इसका सरल जवाब है: मेरे जीवन के हर क्षेत्र में 365% वृद्धि हो जाएगी। आपके जीवन के सभी क्षेत्रों में 365% वृद्धि कैसी दिखेगी?अगर हम अपने जीवन में 1-1% करके हर दिन सुई को आगे बढ़ाते हैं, तो हमें एक साल में 365% बेहतरी मिल जाएगी - 3.65 गुना बेहतर।यह जबरदस्त है, लेकिन ठहरिए, इसमें हमने चक्रवृद्धि की शक्ति पर तो विचार किया ही नहीं है। वास्तव में, अगर हम अपने जीवन में हर दिन सुई को 1% आगे बढ़ाते हैं और पर्याप्त निरंतरता, लगन व समय को शामिल करते हैं, तो हम साल भर में 3,700% बेहतर हो सकते हैं।इसे दुबारा पढ़ें: 1% नियम की शक्ति का दोहन करके आप सबसे बुरी स्थिति में 3.65 गुना बेहतर बनने जा रहे हैं, लेकिन आप संभवतः 3,700% या 37 गुना बेहतरी पैदा कर सकते हैं। रविवार, 27 सितंबर, 2020 रविवार, 27 सितंबर, 2020 नई भाषा से करें दोस्ती नई भाषा से करें दोस्ती
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