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हमारे हाथ में है जीवन हमारे हाथ में है जीवन किसी चीज की कागजी कीमत नहीं, बल्कि आपको उससे वास्तव में क्या मिलता है,इस बात से उस चीज का महत्व आंक किसी चीज की कागजी कीमत नहीं, बल्कि आपको उससे वास्तव में क्या मिलता है,इस बात से उस चीज का महत्व आंका जाना चाहिए।सार्थकता का सफर हम सुख देने के लिए आए हैं, मांगने नहीं। जब कभी लगेगा कि सुख की चाह नहीं बची, तब कोई चीज़ निराश नहीं हम सुख देने के लिए आए हैं, मांगने नहीं। जब कभी लगेगा कि सुख की चाह नहीं बची, तब कोई चीज़ निराश नहीं कर सकेगी।हम देने आए हैं... आइडिया से शुरुआतहममें से कई कह सकते हैं कि कहना बड़ा आसान होता है, करना नहीं। लेकिन किसी भी काम की शु आइडिया से शुरुआतहममें से कई कह सकते हैं कि कहना बड़ा आसान होता है, करना नहीं। लेकिन किसी भी काम की शुरुआत तो कहने से यानी किसी आइडिया से ही होगी। मैंने अभी कुछ युवाओं को देखा है जिन्होंने अपनी टीम बनाकर घरेलू पानी की टंकियों को मेंटेन करने का सालाना अनुबंध लिया। लगभग 1,000 मकानों का कार्य उनके हाथ में आ चुका है। इसी तरह सैकड़ों अन्य स्टार्टअप हैं, जो आप घर बैठे प्रारंभ कर सकते हैं। आप किसी भी उम्र के हों, आप कितने भी शिक्षित हों, उससे कोई फर्क नहीं पड़ता।लोग क्या कहेंगे यह न सोचें, क्योंकि मुश्किल आपकी है और उनसे बाहर आने की जिम्मेदारी भी आपकी है। हिम्मत, मेहनत और नीयत रखेंगे तो काबिलियत अपने आप आ जाएगी। हताशा में कोई गलत काम मत कीजिए। बदलाव का श्रीगणेश विचार से आपकी सफलता का पैमाना इस बात पर निर्भर करता है कि प्रतिदिन, हर मिनट आप क बदलाव का श्रीगणेश विचार से आपकी सफलता का पैमाना इस बात पर निर्भर करता है कि प्रतिदिन, हर मिनट आप क्या सोचते हैं। आपके विचार आपकी दुनिया के रूप-रंग का निर्माण करते हैं। आपकी बाहरी दुनिया आपके अंदर की दुनिया का प्रतिबिंब है। इसका मतलब ये है कि यदि आप अपनी जिंदगी बदलना चाहते हैं, तो अपने दिमाग में चलने वाले विचारों को बदलना शुरू कर दें। जैसे-जैसे विचार बदलेंगे, जिंदगी भी बदलने लगेगी। आप जैसा चाहते हैं, वैसा सोचते हैं। गौर करने वाली बात यह है कि आप अपनी सोच का तरीका बदल सकते हैं। सोच के पैटर्न भी आदतें ही होती हैं। अपनी इच्छाशक्ति से दूसरी आदतों की तरह इन्हें भी बदला जा सकता है। सोच एक दिन में नहीं बदलती। इसके लिए बहुत मेहनत करनी पड़ेगी। लेकिन 30 दिनों तक नियमित रूप से मन लगाकर अभ्यास करने से आपको अपनी सोच, अनुभव करने और कार्य करने के तरीके में आश्चर्यजनक बदलाव देखने को मिलेंगे। एक बेहतर जीवन पाने का महत्वपूर्ण उपाय है : अपनी छवि में परिवर्तन। हम दिमाग में अपने बारे में जिस तरह की राय और चित्र बनाकर रखते हैं, उसी के अनुसार छवि का निर्माण होता है। दिमाग इसी के अनुसार काम करता है। हम दिमाग को बताएं कि हम जीवन में क्या चाहते हैं और क्या कर सकते हैं, तो हमारी छवि में भी नाटकीय सुधार आ जाएगा। आप जिस भी चीज में निष्ठा और ईमानदारी से विश्वास करते हैं, उसे हासिल कर सकते हैं। उस दिशा में अनवरत डटे रहें, तो वह आपको मिल जाएगी। अपने सपनों को हमेशा मन-मस्तिष्क में बनाए रहें। दिन-प्रति-दिन दुहराते रहें। एक इंसान का दिमाग एक समय में एक ही विचार पर ध्यान केंद्रित कर सकता है। अत: हमेशा महत्वपूर्ण और सकारात्मक विचार ही मन में रखें। कमजोर करने वाला कोई विचार दिमाग में घुस आए, तो तुरंत अच्छे विचार लाकर उसे बाहर कर दें। आपके मनो-मस्तिष्क में सफलता संबंधी एक तंत्र होता है। यह हमेशा सकारात्मक प्रेरणा की चाह रखता है। इसे बस आपके निर्देश की प्रतीक्षा रहती है। जब आप अपने लिए बड़ा लक्ष्य निर्धारित करते हैं, तो इसमें जान आ जाती है। रविवार, 28 जून 2020 रविवार, 28 जून 2020 विश्वास बनाना अनुशासन है!जो दिल न चाहता हो, वो करना ही पड़े, नियम से, उसे क्या कहते हैं?अक्सर किसी की विश्वास बनाना अनुशासन है!जो दिल न चाहता हो, वो करना ही पड़े, नियम से, उसे क्या कहते हैं?अक्सर किसी की तारीफ में कहा जाता है कि वो शख्स बहुत अनुशासन में रहता है। ये तारीफ है क्योंकि अनुशासन में रहना आसान नहीं है। हम इंसान आराम की ज़िंदगी जी सकते हैं। दूसरे प्राणियों की तरह हम प्राकृतिक खतरों के हवाले नहीं हैं। हमें अपना भोजन जुटाना, अपनी सुरक्षा करना और नियोजित ढंग से जीना आता है, सो हमें ज़िंदा रहने के लिए हर समय दौड़-भाग नहीं करनी पड़ती। आराम का जीवन हम बिता सकते हैं। चैन से कमाओ और खाओ। इस आरामो-सुकून में कोई नियम और अनुशासन पिरो दे, तो चुभन हर आरामतलब को ही नहीं, हर इंसान को महसूस होती है।किसको पसंद होगा - सुबह पांच बजे उठकर व्यायाम करना, अपने काम खुद करना, उसूल बनाना और उन पर हर हाल में कायम रहना, समय की पाबंदी को सांसों की लय की तरह निभाना, बात का पक्का होना। अनुशासन के और भी कई रूप हैं, जो पालन करने वाले को इनके निबाह का दबाव महसूस करवाते हैं। लेकिन देखा जाए, तो यही अनुशासन जिस इंसान के गुणों में शामिल होता है, वो कर्त्तव्य का जिरहबख्तर पहने डटा रहता है। इसका वजन बहुत ज्यादा होता है। इसीलिए हर व्यक्ति नहीं उठा पाता। जहां थोड़ी हिम्मत कम पड़ती है, वो उसे ताक पर रखकर समझौते करने लगता है।अनुशासन कर्त्तव्यपालन का आधार है। जो बात के पक्के होते हैं, वो वक्त के पाबंद होते हैं। जो समय की कद्र करते हैं, वे अपने फर्ज को शानदार ढंग से अंजाम दे पाते हैं। और ऐसे लोगों की प्रतिबद्धता निर्विवाद होती है। इनकी विश्वसनीयता इन्हें सबसे ज्यादा ‘डिपेंडेबल’ बनाती है। इस कदर भरोसेमंद होने के लिए उतना ही अनुशासनप्रिय होना ज़रूरी होता है।अनुशासन की कीमत समझने वाले, इसे किसी रत्न की तरह सम्भालते हैं। वे जानते हैं कि सबकी तरह उनकी राह में कांटे आएंगे ही, क्योंकि यही तो आजमाइश होगी कि अनुशासन छूटेगा तो नहीं। ऐसा दौर आने पर वे डटकर उसका सामना करते हैं। जो मुश्किलों से नहीं घबराते, उन पर सबका विश्वास होता है। इसीलिए विश्वसनीय और वफादार माने जाते हैं। कहते हैं ना, वफादारी और हौसला, अनुशासनप्रियता के आधार हैं, जो महाशक्तियां कही जा सकती हैं।
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