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कल के लिए कविता कल के लिए कविता ओशो ओशो प्राथमिकता कार्यसूची बनानारिसर्च में शामिल 99% लोगों ने बताया कि वो अपने दिन को एक दिन पहले या उसी द प्राथमिकता कार्यसूची बनानारिसर्च में शामिल 99% लोगों ने बताया कि वो अपने दिन को एक दिन पहले या उसी दिन सुबह ही प्लान कर लेते हैं। सफल लोगों में से कोई भी ऐसा नहीं था, जिसके पास अपने दिन की कोई योजना न रहती हो। ये सब मिनटों और घंटों का हिसाब करने वाले लोग हैं, जिससे इनके पास हर चीज के लिए पर्याप्त वक्त होता है। कई का यह मानना है कि यदि आपने प्राथमिकता युक्त कार्यसूची नहीं बनाई, तो आपने अब तक जीवन जीना शुरू ही नहीं किया है।बहरहाल, इन 6 में से कोई भी आदत अपनाने में किसी भी प्रकार का कोई खर्च नहीं है। सिर्फ आपको यह तय करना है कि आप अपने जीवन में कुछ हासिल करेंगे या उसे यूं ही औसत बनकर बिता देंगे। मोहब्बत में अकुलाहट है और विवाह के बंधन में सुख। ऐसा क्यों है, यह इस प्रतीकात्मक कथा के माध्यम से बे मोहब्बत में अकुलाहट है और विवाह के बंधन में सुख। ऐसा क्यों है, यह इस प्रतीकात्मक कथा के माध्यम से बेहतर समझा जा सकता है।इश्क और शादी का अर्थ दौलतमंद बनने से पहले समझिए कि धन और अमीरी वास्तव में क्या हैं। अश्विन सांघी और सुनील दलाल ने ‘अमीर ब दौलतमंद बनने से पहले समझिए कि धन और अमीरी वास्तव में क्या हैं। अश्विन सांघी और सुनील दलाल ने ‘अमीर बनने के 13 पक्के तरीके’ में दिया है यह संकेत।धन का रहस्य रविवार, 5 जुलाई 2020 रविवार, 5 जुलाई 2020 अच्छा बनने में मदद कर सकती हैं किताबें...दूसरों को समझना चाहते हैं, तो किताबों से दोस्ती करें।कहते ह अच्छा बनने में मदद कर सकती हैं किताबें...दूसरों को समझना चाहते हैं, तो किताबों से दोस्ती करें।कहते हैं, एक इंसान के चरित्र का सबसे सटीक प्रमाण उसका उन लोगों के साथ व्यवहार देता है, जो उसके लिए कुछ नहीं कर सकते और वे जो उसका विरोध नहीं कर सकते। दोनों की रूप में देखें, तो बात उन लोगों से व्यवहार की है, जो दरअसल कमज़ोर हैं, या ऐसे हैं, जिनसे किसी तरह की कोई अपेक्षा जुड़ी हुई नहीं है। जो आपके लिए कुछ कर नहीं सकते, उनके साथ मृदु व्यवहार करना उम्दा चरित्र का प्रमाण है। वहीं जो विरोध ही नहीं कर सकते, उनके साथ जो लोग अच्छा व्यवहार करते हैं, उन्हें मान देते हैं, उन्हें अपने बराबर समझते हैं, ज़ाहिर है, वे लोग बहुत अच्छे दिल के मालिक होंगे।इंसान की पहचान का एक और तरीका गुस्ताव द्वारा बताया गया है। उनका कहना है, ‘किसी इंसान को समझना हो, तो देखो कि उसके हाथ में कैसी किताब है। जैसी किताब, वैसा इंसान।’ आप क्यो पढ़ते हैं, यह भी आपके बारे में बहुत कुछ बता देता है।मशहूर लोगों की जीवनियां, अच्छी कहानियां, नाटक, आत्मविश्लेषण को प्रेरित करती किताबों को पढ़ने वाले को समानता की बात आसानी से समझ में आती है। किताबें राह दिखाती हैं। एक युवती ने तो अपनी शिक्षिका को अपना सबसे बड़ा हितैषी माना है क्योंकि उन्होंने उसे पढ़ना सिखाया। पढ़ने से समझ में आया कि अगर दूसरे के सुख-दुख उससे मिलकर साझा नहीं कर सकते हों, तो कहानियों के पात्रों के ज़रिए दूसरों को समझने की कोशिश की जा सकती है।फियोदोर दोस्तोएवेस्की की एक किताब है, ‘ग़रीब लोग।’ यह पूरी कहानी, दो लोगों के पत्रों के ज़रिए लिखी गई है। ग़रीबों की बस्ती में रहते दो लोग अपनी ज़िंदगी की कड़वाहटें, सुख, सबक और इच्छाएं पत्रों के ज़रिए साझा करते हैं। इन पत्रों में पात्रों की दुनिया का इतना सजीव चित्रण है कि पाठक उनके साथ जीने लगता है, ऐसे कि पाठक कभी एेसी किसी बस्ती से गुज़रे, तो सोचे कि कौन-सा घर उस बुज़ुर्ग का होगा और कौन-सा उस लड़की का। वे समानुभूति महसूस कर सकते हैं। और यह अहसास, इसका व्यक्तित्व में शामिल होना, अच्छे चरित्र का आधार बन जाता है। हम सबके जूतों में पैर डालकर, चुभती कील की टीस भले न देख सकें, लेकिन उसके दर्द का किस्सा सुनकर समझ तो सकते ही हैं।
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